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इंद्रधनुष के पीछे का राज

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बरसात का मौसम काफी सुहावना लगता है। इस मौसम का अपना ही मजा है और ऐसे में प्रकृति का रूप और भी निखर कर आता है। बारिश तो बढ़िया लगती ही है, लेकिन उसके बाद का नजारा भी कम दिलचस्प नहीं होता। साफ आसमान में जब इंद्रधनुष निकलता है तो उस खूबसूरत नजारे को देखने का अपना ही मजा है। बच्चे हों या बड़े इंद्रधनुष हर किसी को भाता है। इसको देखने में कुछ ऐसा लगता है मानों प्रकृति मुस्कुरा रही हो। कई बार आसमान में दो इंद्रधनुष भी निकलते हैं और कई बार एक सीधा और उल्टा भी होता हैं। कई लोगों के मन में सवाल होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है। इसी के बारे में आपको हम जानकारी देने वाले हैं – इंद्रधनुष यानी बारिश के मौसम में आसमान में दिखाई देने वाली धनुष के आकार की आकृति जो सात रंगों से बनी होती है। हिन्दू संस्कृति में इंद्र को वर्षा का देवता माना जाता है। ऐसे में सूर्य एवं जल के मेल पर जो धनुष की आकृति बनती हैं उसको भगवान इंद्र के धनुष की संज्ञा दी जाती है। इसमें सात अलग-अलग रंग होते हैं। आपने बचपन में साइंस क्लास में इसके बारे में पढ़ा ही होगा कि इंद्रधनुष में सात रंग मौजूद होते हैं – बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल, जिसे हिंदी में ‘बैनीआहपीनाला’ और अंग्रेजी में VIBGYOR भी कहते हैं। इन रंगों का पता प्रिज्म के जरिए चलता है। इंद्रधनुष असल में प्रकृति का प्रिज्म है। पानी की छोटी-छोटी बूंदें पारदर्शी प्रिज्म का काम करती हैं। जब सूर्य का प्रकाश उनसे होकर गुजरता है तो वो सात अलग-अलग रंगों में टूट जाता है जिसकी वजह से ही हमें इंद्रधनुष दिखाई देते हैं।


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