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International Yoga Day : योग का इतिहास और महत्व, जानें क्या है इस बार की थीम

International Yoga Day : योग का इतिहास और महत्व, जानें क्या है इस बार की थीम

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नई दिल्ली। दुनिया भर में 21 जून को इंटरनेशनल योग दिवस (International Yoga day) मनाया जाता है, हर साल इस दिन के लिए कोई विशेष थीम रखी जाती है। योग का अपने आप में ही बड़ा महत्व है। योग किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ रखने में और कई तरह की बीमारियों से लड़ने में काम आता है। ऐसे में योग दिवस 2020 के इस अवसर हम आपको बताने जा रहे हैं कि योग दिवस का आखिर इतिहास क्या रहा है, इसका महत्व क्या है और साल 2020 की योग दिवस की थीम क्या है।


बता दें, योग तकरीबन 5000 साल पहले से लोगों द्वारा पसंद किया जा रहा है। योग को प्राचीन समय में साधु संत, ध्यान लगाने में इस्तेमाल करते थे, जिसके बाद इसे दुनिया भर में स्वस्थ शरीर के लिए उपयोग किया जाने लगा। बता दें, योग दिवस का मुख्य काम इस प्राचीन परंपरा के बारे में लोगों के बीच जागरूकता लाना है। बता दें, पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में योग की पहल की थी, जिसके बाद से यह दुनिया भर के कई देशों में मनाया जाने लगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) को अपने संबोधन के दौरान कहा था कि यही वो दिन है जब उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है। इस दिन सूर्य जल्दी उगता है और सबसे देर में सूर्यास्त होता है।

बात करें इस दिन के इतिहास की तो 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है।

बता दें, हर साल योग दिवस के दिन कुछ थीम रखी जाती है तो इस बार कोरोना वायरस को देखते हुए 2020 की थीम ‘घर में रहते हुए अपने परिवार के साथ योग करना’ है। इसके अलावा पहले जो हर साल थीम राखी जाती रही हैं वह इस प्रकार हैं :

2016: युवाओं को कनेक्ट करें (Connect the youth)

2017: स्वास्थ्य के लिए योग (Yoga for Health)

2018: शांति के लिए योग (Yoga for Peace)

2019: पर्यावरण के लिए योग (Yoga for Climate Actio

एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि योग की वैकल्पिक मुद्राएं और मंत्रों के जाप से मौखिक और दृष्टि संबंधी कुशलता के साथ-साथ ध्यान और जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है। आज के समय में तनाव, हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। तनाव, स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है और सहानुभूति से जुड़ी अतिसक्रियता मस्तिष्क में मौजूद हिप्पोकैम्पल सर्किट (स्मृति स्थल) को नुकसान पहुंचाती है। तनाव की वजह से इन्फ्लेमेशन, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, हाइपरटेंशन, नींद में बाधा आना और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं और ये सभी फैक्टर्स डिमेंशिया बीमारी के जोखिम कारक हैं।

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