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इस बार खास हैं कृष्ण जन्माष्टमी, व्रत करने से होगी पूरी मनोकामना

इस बार खास हैं कृष्ण जन्माष्टमी, व्रत करने से होगी पूरी मनोकामना

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भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भारत सहित दुनिया भर में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा द्वापर युग में बना था। इस संयोग को कृष्ण जयंती योग के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा संयोग कई वर्षों में बनता है और इसका आध्यात्मिक जगत में बड़ा महत्व है। ऐसे में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण पूजन और व्रत रखना बहुत ही शुभ माना जा रहा है।

ज्योतिर्विद पं दयानन्द शास्त्री के अनुसार मान्यता है कि इस दिन श्री कृष्ण की पूजा करने से सभी दुखों व शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति व प्रेम आता है। इस दिन अगर श्री कृष्ण प्रसन्न हो जाएं तो संतान संबंधित सभी विपदाएं दूर हो जाती हैं। श्री कृष्ण जातकों के सभी कष्टों को हर लेते हैं। इस दिन गीता, विष्णुपुराण, कृष्णलीला का पाठ शुभ फलदायी माना गया है।

कब है कृष्ण जन्माष्टमी

2 सितम्बर को गृहस्थ, सामान्य जन, स्मार्त सम्प्रदाय के लोग व्रत करेंगे।
3 सितंबर को वैष्णव सम्प्रदाय के लोग व्रत करेंगे।

इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर 2018 दिन रविवार को मनाई जाएगी, वहीं उदया तिथि अष्टमी एवं उदय कालिक रोहिणी नक्षत्र को मानने वाले वैष्णव जन 3 सितम्बर सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत पर्व मनाएंगे।

यद्यपि अष्टमी तिथि रविवार को शाम 5 बजकर 9 मिनट से प्रारम्भ होकर सोमवार को दोपहर दिन में 3 बजकर 29 मिनट तक व्याप्त रहेगी। साथ ही रोहिणी नक्षत्र भी रविवार की सायं 6 बजकर 29 मिनट से प्रारम्भ होकर अगले दिन सोमवार को दिन में 5 बजकर 35 मिनट तक व्याप्त रहेगी। रोहिणी नक्षत्र दोनों का योग अर्धरात्रि के समय मिल रहा है। इसलिए 2 सितंबर दिन रविवार को ही जयन्ती योग में श्रीकृष्णावतार एवं जन्माष्टमी का व्रत सबके लिए होगा। इस जन्माष्टमी को त्रिपुष्कर योग बना हुआ है। इस योग में जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका तीन गुणा लाभ मिलता है।

ऐसे करें जन्माष्टमी का व्रत

जन्माष्टमी से एक रात से एक दिन पहले ही उपासक को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। उसके बाद सुबह नहा धोकर स्वच्छ पीत वस्त्र धारण कर, और सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि सभी देवताओं का स्मरण करते हुए पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके कुशा के आसन पर बैठ जाये । अब अपने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प, कुश और गंध लेकर संकल्प करें।

ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

मन्त्र का कम से कम 251 बार जप करें । ऐसा करने से श्री कृष्ण की कृपा से जीवन में आ रहे संघर्षों से मुक्ति मिलती हैं।

अब दोपहर के समय काले तिलों को पानी में डालकर माता देवकी जी स्नान के लिए ‘सूतिकागृह’ नियत करें, और फिर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, इसे अलग से या अपने मंदिर में स्थापित कर सकते हैं । यदि चित्र या मूर्ति में देवकी मां बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई हों और लक्ष्मी जी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हो, तो यह बहुत उत्तम माना जाता हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन अर्चना करें। पूजन पूर्ण होने के बाद निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें।

‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।।

रात में खोले उपवास

किसी कृष्ण मंदिर में या अन्यत्र जहां उत्सव मनाया जा रहा हो वहां भजन कीर्तन करके, रात को होने वाली कृष्ण जन्म की आरती के बाद माखन मिश्री के भोग से अपने उपवास को खोलना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण का विधि विधान से व्रत पूजन किया जाये तो जीवन में किसी भी चीज का अभाव नहीं रहता।

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