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कुबेर देव धन के अधिपति

कुबेर देव धन के अधिपति

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कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। इस मंत्र द्वारा कुबेर देव का ध्यान करना चाहिए …


आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।
कोशं वद्र्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।

मंत्र :
‘ऊं श्रीं ऊं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।’
ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय
‘ऊँ कुबेराय नमः।’

धन प्राप्ति के लिए पूरे विधि विधान से कुबेर देव से पूजा करनी चाहिए। यह पूजा किसी पंडित से पूछ कर श्रेष्ठ दिन करनी चाहिए। यदि पूजा में तिजोरी या बक्से का प्रयोग कर रहें हैं तो उस पर रोली से स्वस्तिक बनाना चाहिए परंतु मूर्ति का प्रयोग कर रहे हैं तो उसके सामने स्वस्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। इसके बाद पूरी श्रद्धाभाव से मंत्रों का जाप करते हुए कुबेर देव का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद ‘ऊँ कुबेराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। अंत में तिजोरी या कुबेर देव की धूप, दीप, फूल व गंध से उनकी पूजा करनी चाहिए। धन प्राप्ति की प्रार्थना करते हुए पूजा में प्रयोग की गई हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, दूर्वा आदि को एक कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना चाहिए। कुबेर देव को धन का अधिपति कहा जाता है। माना जाता है कि पूरे विधि- विधान से जो भी कुबेर देव की पूजा करता है उसके घर में कभी धन संपत्ति की कभी कमी नहीं रहती है।

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