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दशहरा पर्व: पालकी में विराजमान होंगे महेश्वर, 1972 जैसे हालात की जताई आशंका

दशहरा पर्व: पालकी में विराजमान होंगे महेश्वर, 1972 जैसे हालात की जताई आशंका

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कुल्लू। देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा पर्व से पहले भगवान रघुनाथ के प्रमुख छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया है कि वह नरसिंह भगवान की जलेब के दौरान पालकी में विराजमान होंगे। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की आशंका जताई है कि कहीं 1972 जैसे हालात पैदा ना हो जाएं। वर्ष 1972 में भी देव परंपराओं को लेकर उठे विवाद के बीच इसी तरह की स्थिति पैदा हो गई थी। महेश्वर सिंह ने इसी के चलते आज पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि इसके लिए ही उन्होंने राज्यपाल आचार्य देवव्रत से देव परंपराओं के निर्वहन के लिए संरक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो वह हाईकोर्ट से भी परंपराओं को निभाने के लिए संरक्षण मांगेंगे।
m-2महेश्वर सिंह का कहना है कि वह सीएम वीरभद्र सिंह के दोहरे आचरण से वह ही नहीं बल्कि पूरा देव समाज सकते में है। उनका कहना है कि वीरभद्र सिंह के बयान देव समाज के हित में नहीं हैं। देव महाकुंभ दशहरा पर्व सिर पर है और सीएम जो बयान दे रहे हैं उससे देव समाज में अराजकता का माहौल बना हुआ है। कभी सीएम न्यायालय में विचाराधीन रघुनाथ मंदिर को लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं, तो कभी दशहरा पर्व में चलने वाली नरसिंह भगवान की जलेब में पालकी पर बैठने को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। पहले दिन पालकी पर बैठने को लेकर वीरभद्र सिंह विरोध जताते हैं और दूसरे दिन कुछ बयान आता है कि दशहरा पर्व में सभी पुरानी परंपराएं यथावत चलेंगी।
महेश्वर ने अपने अनुज व वीरभद्र सरकार में आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह पर भी दोहरी नीति पर चलने का आरोप लगाया। इसलिए उन्हें खतरा है कि दशहरा पर्व में देव परंपराओं को लेकर सरकार कुछ भी कर सकती है और 1972 जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। महेश्वर का कहना है कि इसलिए ही राज्यपाल से संरक्षण की मांग की गई है कि ताकि दशहरा पर्व में सरकार की दोगली नीति का शिकार न होना पड़े। उन्होंने सीएम द्वारा हाल ही में देव ट्रस्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मामला जब न्यायालय में विचाराधीन है तो ट्रस्ट कैसे बन सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले सीएम वीरभद्र सिंह दशहरा उत्सव में रथ यात्रा के दौरान जूतों के साथ रथ पर आ बैठे थे, उस समय भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी। महेश्वर सिंह का कहना है कि हालांकि दशहरा उत्सव का आयोजन दो भागों में बांटा गया है, एक धार्मिक आयोजन तो दूसरा सांस्कृतिक आयोजन। दोनों की बराबर महत्ता है, इसलिए आवश्यक है कि यह मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो इसके लिए सरकार पुख्ता इंतजाम करें।

kulluभगवान रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण की सुनाई 26 को

शिमला। भगवान रघुनाथ मंदिर कुल्लू के अधिग्रहण के निर्णय को चुनौती देने वाली महेश्वर सिंह की हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर सुनवाई अब सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। न्यायाधीश त्रिलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने महेश्वर सिंह को प्रतिवादियों के जवाब का प्रति उत्तर दायर करने के आदेश भी दिए। इस याचिका में महेश्वर सिंह के भाई कर्ण सिंह के आवेदन को मंजूर कर कोर्ट ने उसे प्रतिवादी बनाया था। कर्ण सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया था कि महेश्वर सिंह द्वारा दायर याचिका में उसे जानबूझ कर पार्टी नहीं बनाया गया जबकि वह महेश्वर सिंह का सगा भाई है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

https://youtu.be/fcDrH0DFNE4

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