Covid-19 Update

57,210
मामले (हिमाचल)
55,797
मरीज ठीक हुए
961
मौत
10,668,674
मामले (भारत)
99,839,353
मामले (दुनिया)

ऐसा दानवीर…जो भी मांगा नहीं किया मना

ऐसा दानवीर…जो भी मांगा नहीं किया मना

- Advertisement -

कुंती राजा कुंतिभोज की पुत्री थी। एक बार कुंती के यहा ऋषि दुर्वासा पधारे और कुंती ने उनकी खूब सेवा की। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर ऋषि दुर्वासा ने कुंती को आशीर्वाद दिया कि वह जिस भी देवता का ध्यान करेगी उसके समान ही पुत्र का जन्म होगा। कौतूहलवश उन्होंने शक्ति का प्रयोग कर सूर्यदेव का आह्वान कर दिया। सूर्यदेव आए तो आसन नदी के किनारे की वह पथरीली चट्टान पिघल गई। सूर्यदेव कुंती के आह्वान पर आए थे, लिहाजा उन्होंने कुंती को एक पुत्र प्रदान किया।

सूर्य देव के जाने के बाद कुंती ने लोकलाज के डर से कवच-कुंडल व दिव्यास्त्रों के साथ जन्म लेने वाले इस पुत्र को स्वर्ण-मंजूषा में रख कर आसन नदी में बहा दिया। इस मंजूषा को कुरुवंश की अश्वशाला के अधिकारी अधिरथ ने खोल कर उसमें निकले बच्चे को उठा लिया अधिरथ के उस समय कोई संतान नहीं थी इसलिए वह उसको अपने घर ले गया और पुत्र की तरह पाला। कवच-कुंडल व दिव्यास्त्रों के साथ मिला होने की वजह से बालक का नाम कर्ण रखा गया। कर्ण महाभारत के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक है। कर्ण दुर्योधन का सबसे अच्छा मित्र था और महाभारत के युद्ध में वह अपने भाइयों के विरुद्ध लड़ा।

कर्ण को एक आदर्श दानवीर माना जाता है क्योंकि कर्ण ने कभी भी किसी मांगने वाले को दान में कुछ भी देने से कभी भी मना नहीं किया भले ही इसके परिणामस्वरूप उसके अपने ही प्राण संकट में क्यों न पड़ गए हों। कर्ण की छवि आज भी भारतीय जनमानस में एक ऐसे महायोद्धा की है जो जीवनभर प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ता रहा। बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि कर्ण को कभी भी वह सब नहीं मिला जिसका वह वास्तविक रूप से अधिकारी था। तर्कसंगत रूप से कहा जाए तो हस्तिनापुर के सिंहासन का वास्तविक अधिकारी कर्ण ही था क्योंकि वह कुरु राजपरिवार से ही था और युधिष्ठिर और दुर्योधन से ज्येष्ठ था, लेकिन उसकी वास्तविक पहचान उसकी मृत्यु तक अज्ञात ही रही।

कर्ण की छवि द्रौपदी का अपमान किए जाने और अभिमन्यु वध में उसकी नकारात्मक भूमिका के कारण धूमिल भी हुई थी, लेकिन कुल मिलाकर कर्ण को एक दानवीर और महान योद्धा माना जाता है। सूर्य पुत्र कर्ण की जब मृत्यु हुई तो उनका अंतिम संस्कार भूमि पर नहीं किया गया था क्योंकि उन्होंने श्रीकृष्ण से वरदान मांगा था कि मृत्यु के बाद मेरी देह का ऐसे स्थान पर अंतिम संस्कार कीजिए जहां कोई पाप न हुआ हो संपूर्ण धरती पर ऐसे स्थान की खोज की गई, लेकिन कोई जगह ऐसी नहीं मिली सकी जहां पाप न हुआ हो। सिर्फ कृष्ण के हाथ ही ऐसे स्थान थे जहां कोई पाप नहीं हुआ था। इसी कारण से कर्ण का अंतिम संस्कार कृष्ण के हाथों पर किया गया था।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष


HP : Board


सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है