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बिरोजा और तारपीन फैक्टरी नाहन के मजदूर व प्रबंधन आमने-सामने

बिरोजा और तारपीन फैक्टरी नाहन के मजदूर व प्रबंधन आमने-सामने

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नाहन। सरकारी क्षेत्र की बिरोजा एवं तारपीन फैक्टरी नाहन में प्रबंधन व मजदूर यूनियन आमने-सामने आ गए हैं। मजदूर यूनियन ने फैक्टरी के महाप्रबंधक पर उनकी मांगें पूरी न करने और प्रताड़ना के आरोप जड़े हैं। वहीं, जीएम ने भी मजदूर यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान की ओर से ट्रांसफर की धमकी मिलने, यूनियन सदस्यों पर प्रबंधन के खिलाफ बेवजह दबाव बनाने का आरोप लगाया है। जीएम ने इस मामले में वरिष्ठ उपप्रधान को नोटिस भी दिया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच यूनियन व जीएम की ओर से अपनी-अपनी शिकायतें उच्चाधिकारियों को भेज दी हैं।

क्या कहती है मजदूर यूनियन

मजदूर यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान, महासचिव देवदत्त समेत कई कामगारों का कहना है कि फैक्टरी में राज्य वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के निर्देशों की अवहेलना हो रही है। कामगारों को सेफ्टी शूज नहीं दिए गए हैं। जबकि, सेफ्टी शूज देने के लिए 1215 रुपये सितंबर माह के वेतन में दिए जाने के निर्देश दिए गए थे। सेवानिवृत्त कामगारों के मेडिकल बिलों का मामला लटका है। इसके अलावा यूनियन ने तेल साबुन का खर्चा भी अभी तक नहीं दिया गया है। वहीं, यूनियन ने जीएम पर प्रताड़ना के आरोप भी जड़े हैं। इसकी शिकायत यूनियन ने राज्य वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक को भेजी है।


क्या कहते हैं महाप्रबंधक

फैक्टरी के जीएम परमिंद्र सिंह ने बताया कि सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं। यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान फैक्टरी के कामकाज में खलल डाल रहे हैं। उनसे दुर्व्यवहार किया गया है। स्टाफ को बेवजह परेशान किया जा रहा है। कार्यालय के रिकार्ड से भी छेड़छाड़ हुई है। लिहाजा, इसके लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया है। उन्हें ट्रांसफर की धमकी भी दी गई है। साबुन तेल का खर्च, मेडिकल बिलों का भुगतान संबंधी मामला प्रबंधन को भेजा गया है। रही सेफ्टी शूज देने की बात तो वरिष्ठ उपप्रधान ने इसे रिजेक्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति यूनियन का हवाला देकर बेवजह दवाब बना रहा है। इसके खिलाफ 2015 में अकुशल कामगारों की हुई भर्ती में अपने बेटे को नियमों को ताक पर रख नौकरी दिलाने का मामला भी चल रहा है।

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