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लक्ष्मी उपासना का पर्व दिवाली 

लक्ष्मी उपासना का पर्व दिवाली 

कहते हैं लक्ष्मी के सहस्र चरण हैं पर वह अंधेरे में नहीं आ पाती। वह केवल प्रकाश में अपना रास्ता तय करती है। इसी लिए इस महानिशा में असंख्य दीप जला कर लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है। ऐसे में लक्ष्मी अंधकार के प्रतीक उल्लू को अपनी सवारी बनाकर आलोक रश्मियों के रथ पर सवार हो कर आती है।
वास्तव में लक्ष्मी महादेवी का एक रूप है और वह अनेक रूपों में धरती पर आती है। दीपावली लक्ष्मी उपासना का पर्व है तथा इसे धन-धान्य, सुख-संपदा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जरूरी यह भी है कि लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमाओं के साथ कुबेर प्रतिमा या चित्र की भी स्थापना करें। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, वे आपके भी धन की रक्षा करेंगे और इस तरह अनायास होने वाला धन का खर्च बचा रहेगा। भगवती लक्ष्मी साक्षात नारायणी हैं और सभी चल व अचल में सामान्य रूप से निवास करती हैं। भगवान गणेश शुभ और लाभ के नियामक तथा सभी अमंगलों और विघ्नों के नाशक हैं। अत: इनके एक साथ पूजन से मनुष्य मात्र का कल्याण होता है। इनका विधि विधान से पूजन करें और सामग्री पहले ही एकत्र कर लें।
सामग्री- लक्ष्मी व गणेश जी तथा कुबेर की मूर्तियां,सोने अथवा चांदी का सिक्का, कलश,स्वच्छ कपड़ा, चौकी, धूप-अगरबत्ती, मिट्टी के छोटे-बड़े दीपक, सरसों का तेल, शुद्ध घी, दूध -दही ,शुद्धजल और गंगा जल। हल्दी, रोली, चंदन, कलावा, लाल कपड़ा, कपूर, नारियल, पान के पत्ते, चीनी के खिलौने, खील, सूखे मेवे, मिठाई, छोटी इलायची, कुमकुम, वंदनवार और फूल।
विधि- दीपावली के दिन सुंदर सा वंदनवार अपने मुख्य द्वार पर लगाएं। चौकी धो कर साफ करें , उस पर लाल कपड़ा बिछा कर लक्ष्मी व गणेश तथा कुबेर की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में हो। लक्ष्मी जी की मूर्ति गणेश जी की दाहिनी ओर रखें। कलश को जल से भरें, उसमें सिक्का डाल कर मौली बांधें और लक्ष्मी जी के सामने चावलों की ढेरी पर स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर कलश पर स्थापित करें। कलश वरुण का प्रतीक है इस लिए मन ही मन वरुण का आवाहन करें। अब दो बड़े दीपक रखें, एक में तेल और एक में घी भरें। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें और दूसरा घी वाला दीपक मूर्तियों के चरणों में रखें एक ओर दीपक गणेश जी के सामने रखें।
प्रतिमाओं तथा चांदी के सिक्कों की विधिवत पूजा कर सिंदूर, कुंकुम एवं अक्षत से चर्चित करें। पुष्पों और पुष्प मालाओं से अलंकृत करें। हो सके तो इस पूजा में कमल पुष्पों का प्रयोग करें। नैवेद्य में लाल मिठाई तथा मेवे चढ़ाएं। इसके बाद दीपमालिका का पूजन करें। किसी पात्र में 11,21 या इससे अधिक दीपक जला कर लक्ष्मी के सामने रखें और उनका पूजन करें। इसके बाद सभी दीपकों को जला कर घर के हर स्थान पर रखें। ध्यान रखें लक्ष्मी पूजन करते समय हाथ नहीं जोडऩा चाहिए यह विदा देने की रस्म है इसलिए  मन में ही नमन करें और कहें कि आपका तथा कुबेर जी का हमेशा हमारे घर में स्थिर निवास बना रहे।
लक्ष्मी पूजा के समय घरके हर सदस्य को पूजा स्थल पर मौजूद होना चाहिए और हर व्यक्ति लक्ष्मी जी की आरती करे व गाए यह भी जरूरी है। यदि इस प्रकार  पूजा संपन्न करेंगे तो निश्चय ही लक्ष्मी का आपके घर में  स्थायी निवास होगा।

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