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बेंटनी केसल पर Language And Culture Department का कब्जा

बेंटनी केसल पर Language And Culture Department का कब्जा

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शिमला। बहुचर्चित बेंटनी कैसल का मामला आखिरकार निपट ही गया। सभी विवादों को विराम लग गया और प्रदेश सरकार के भाषा एवं संस्कृति विभाग ने विधिवत रूप से शनिवार को इस विवादित ज़मीन के टुकड़े को भाषा संस्कृति विभाग के नाम कर कब्ज़ा पा लिया है। शिमला शहर के दिल में बसे इस बेंटनी कैसल पर कब्जा पाने के लिए सरकार को एक बड़ी राशि का भी भुगतान भी करना पड़ा है। बताया जा रहा है कि सरकार ने इस संपत्ति को हासिल करने के लिए 27.84 करोड़ रुपए की रकम भी सूद परिवार को अदा की है जो कि इस संपत्ति का मालिक था।


  • सरकार ने चुकाई 27.84 करोड़ रुपए कीमत, संजोई जाएगी शिमला की सांस्कृतिक विरासत
  • सभी अटकलों को लगा विराम, मालिक के रूप में लगा भाषा संस्कृति विभाग का बोर्ड 

शनिवार को एसडीएम शिमला शहरी की मौजूदगी में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी, जिला भाषा अधिकारी और पूर्व मालिक विश्वनाथ सूद परिवार के सदस्यों के समक्ष तहसीलदार कोर्ट में दोपहर को इस जमीन की रजिस्ट्री की गई और दोपहर बाद मौके पर जाकर भवन और जमीन का कब्ज़ा ले लिया। अब यहां पर बतौर मालिक बाकायदा भाषा संस्कृति विभाग का बोर्ड लगा दिया गया है।सूद परिवार के एक सदस्य ने पुष्टि करते हुए बताया कि भाषा संस्कृति विभाग को भवन की चाबियां सौंपकर कब्ज़ा प्रदान कर दिया गया है। शिमला के माल रोड पर सीटीओ से ग्रैंड होटल तक और लक्कड़ बाज़ार की और कार्ट रोड़ तक यह करीब 25 बीघा ज़मीन है। इस पर एक भव्य पुरातन इमारत है जिसमे कभी आईजी ट्रैफिक का कार्यालय था साथ ही पूर्व रोजगार कार्यालय का भवन भी है। यहां पर कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है।

प्राइम लोकेशन पर माल रोड़ की शान इस प्लॉट पर कइयों की निगाहें थी लेकिन सीएम वीरभद्र सिंह की दूरदर्शिता से यह ज़मीन सरकार के नाम हो गई। 25 बीघा इस भूमि पर देवदार के घने पेड़ों के बीच संस्कृति को मंच प्रदान करने के मकसद से मल्टीपर्पज हॉल, हेरिटेज म्यूजियम और पार्क बनाने की योजना है। इस बाबत सीएम पहले ही कह चुके हैं कि इसका इस्तेमाल शिमला की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने के लिए किया जाएगा।

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