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कल गुप्ताजी चप्पल खरीदने गए…..

कल गुप्ताजी चप्पल खरीदने गए…..

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काका को रात में 12 बजे एक लड़की का फोन आया…!

काका –  हेलो कौन…?

लड़की – हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते, तेरे बिना क्या वजूद मेरा…!


काका (खुश होकर) – कौन हैं आप..?

लड़की – तुझसे जुदा अगर हो जायेंगे तो खुद से भी हो जाएंगे जुदा..!

खुशी के मारे काका की आंखों में पानी आ गया.

वो बोले – तुम सच में मुझसे शादी करोगी…?

लड़की – इस गाने को अपनी कॉलर ट्यून बंनाने के लिए 8 दबाएं…!

 

 

 

 

 

 

 

शप्पू – बेकार ही कहते हैं लोग कि पत्नियां अपनी गलती नहीं मानती हैं…

मेरी वाली तो रोज मानती है…!

गप्पू – अच्छा, क्या बोलती है…?

शप्पू – कहती है, गलती हो गई तुमसे शादी करके..

 

 

 

 

 

 

बेटा – पापा बुलेट दिलवा दो..

पापा – पड़ोस की लड़की को देख नालायक,

बस से जाती है…!

बेटा – हां पापा, यही तो देखा नहीं जाता…!

 

 

 

 

 

 

टीचर: तुम तो पढ़ाई में बहुत कमजोर हो….

मैं तुम्हारी उम्र में गणित के इससे भी कठिन सवाल हल कर लेता था.

चप्पू: आपको अच्छे टीचर मिल गए होंगे सर,

सबकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती.

 

 

 

 

 

 

अध्यापक ने एक छात्र से पूछा – बताओ, शाहजहां कौन था…?

छात्र – जी, वह एक मजदूर था…!
.
अध्यापक – कैसे…?
.
छात्र – आपने ही तो कहा था कि शाहजहां ने कई इमारतों

का निर्माण किया था…!

 

 

 

 

 

 

पिछले हफ्ते दांत में दर्द हुआ और मैं जिंदगी में पहली बार दांतों के डॉक्टर के पास गया।
रिसेप्शन में बैठे-बैठे मेरी नजर वहां दीवार पर लगी नेमप्लेट पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही मानो मुझ पर बिजली गिर पड़ी।
“डॉ. नंदिनी भारद्वाज 
यानी, स्कूल के दिनों का हमारी क्लास की हीरोइन। गोरी-चिट्टी, ऊँची-लम्बी, घुँघराले बालों वाली खूबसूरत लड़की।
अब झूठ क्या बोलूँ…क्लास के दूसरे लड़कों के साथ-साथ मैं खुद भी उस पर मरता था, अपनी ‘नंदू’ पर।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई।
मेरा नंबर आने पर मैंने धड़कते दिल से, ‘नंदू’ के चेम्बर में प्रवेश किया।
उसके माथे पर झूलते घुँघराले बाल अब हट चुके थे, गुलाबी गाल अब फूलकर गोल गोल हो गए थे…
नीली आँखें मोटे चश्मे के पीछे छुप गईं थीं लेकिन फिर भी ‘नंदू’ बहुत रौबदार लग रही थी।
लेकिन उसने मुझे पहचाना नहीं।
मेरी दांत की जांच हो जाने के बाद…
मैंने ही उससे पूछा : “तुम आन्नदा महाविद्यालय, हजा़रीबाग में पढ़ती थी ना ?”
वो बोली : “हां “
मैंने पूछा : “12 वीं से कब निकली? 2003 में ना?”
वो बोली : “करेक्ट! लेकिन आपको कैसे मालूम?”
मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया :”अरे, तुम मेरी ही क्लास में थी…”
फिर…वो बोली…. “सर आप कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाते थे..?”
चोट इसे कहते हैं! दर्द ये होता है! दांत का दर्द इसके सामने कुछ नहीं हैं…

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कल गुप्ताजी चप्पल खरीदने गए…..

दुकानदार ने पहले उनके पैर सेनिटाइजर से साफ़ किए,
फिर साबुन से पैर धोए।
टावेल से पैर पोछें। फिर चप्पले पहनाई।
गुप्ता जी ने चुपचाप पैसे दिए और जाने लगे।
दुकानदार ने पूछा कुछ और भी लेना है क्या…?
गुप्ताजी : खरीदना तो अंडरवियर भी था लेकिन आपकी सेवा देख कर खरीदने का इरादा कैंसिल कर दिया!”

 

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