Covid-19 Update

2,21,203
मामले (हिमाचल)
2,16,124
मरीज ठीक हुए
3,701
मौत
34,043,758
मामले (भारत)
240,610,733
मामले (दुनिया)

प्रतियोगिता में शर्त लगी थी की ख़ुशी को 3 शब्दों में लिखो…

प्रतियोगिता में शर्त लगी थी की ख़ुशी को 3 शब्दों में लिखो…

- Advertisement -

नखरे तो शादी से पहले होते हैं साहब…

शादी के बाद तो…

लौकी की सब्जी खाकर भी कहना पड़ता है-

‘तुम्हारे हाथों में तो जादू है जानू’…!!!

 

 

 

 

 

बेटी – मैं पड़ोसी से प्यार करती हूं और…

भाग रही हूं उसके साथ..!!

बाप – थैंक गॉड… मेरे पैसे और

समय दोनों बच गए..!

बेटी – पापा, मैं लेटर पढ़ रही हूं, जो मम्मी

रख के गई है…!!!
.

पिता बेहोश..

 

 

 

 

 

 

सोनू: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है….

दिन-प्रतिदिन इंसान अमीर बनता जाता है।

मोनू: कैसे?

सोनू: बूढ़े होने पर चांदी बालों में,

सोना दांतों में, मोती आंखों में,

शुगर खून में और महंगे पत्थर किडनी में पाए जाने लगते हैं।

 

 

 

 

 

 

पत्नी – तुम्हें जरा भी तमीज नहीं है…

मैं घंटों से बोले जा रही हूं और

तुम हो कि उबासी ले रहे हो…!

पति – मैं उबासी नहीं ले रहा,

बोलने की कोशिश कर रहा हूं,

लेकिन तुम हो कि बोलने ही नहीं दे रही…!!!

 

 

 

 

 

 

जीजा ने साली को दी सोने की चीज…

साली-इतने साल हो गये जीजा की आपने आज तक कुछ नहीं दिया

जीजा-दिल तो दिया है और क्या चाहिए

साली-नहीं जीजा जी, कोई सोने की चीज़ दिलाओ ना

जीजा-चलो शाम को नया तकिया ला दूंगा, खूब मजे से सोना

 

 

 

 

 

 

प्रतियोगिता में शर्त लगी थी की ख़ुशी को 3 शब्दों में लिखो…

सब पुस्तके पलटने लगे

मैंने लिखा ” पत्नी मायके गई”

भाई साहब,, आयोजक मुझे स्टेज तक उठाके ले गए ,,

जाके खूब सम्मान करा और बैंड बाजे से घर तक छोड़ गए।

अब घर के बाहर बैठा हूँ,, पत्नी दरवाजा नहीं खोल रही…

 

 

 

 

 

बेटा —लोकतंत्र पर से यकीन सन 88 में ही उठ गया था

जब हमारी स्कूल की छुट्टियां हुई और रात को खाने की मेज़ पर पापा ने पूछा –
“बताओ बच्चों छुट्टियों में दादा के घर जाना है या नाना के ?”
सब बच्चों ने खुशी से हम आवाज़ होकर नारा लगाया – “दादा के …”
लेकिन अकेली मम्मी ने कहा कि ‘नाना के…।’
बहुमत चूंकि दादा के हक़ में था, लिहाज़ा मम्मी का मत हार गया और पापा ने बच्चों के हक़ में फैसला सुना दिया, और हम दादा के घर जाने की खुशी दिल में दबा कर सो गए ..।
अगली सुबह मम्मी ने तौलिए से गीले बाल सुखाते हुए मुस्कुरा कर कहा – “सब बच्चे जल्दी जल्दी कपड़े बदल लो हम नाना के घर जा रहे हैं…।”
मेंने हैरत से मुँह फाड़ के पापा की तरफ देखा, तो वो नज़रें चुरा कर अख़बार पढ़ने कि अदाकारी करने लगे…
बस मैं उसी वक़्त समझ गया था कि लोकतंत्र में फैसले आवाम की उमंगों के मुताबिक नहीं, बल्कि बन्द कमरों में उस वक़्त होते हैं, जब आवाम सो रही होती है…I

- Advertisement -

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App


विशेष \ लाइफ मंत्रा


Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है