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अटल टनल का लोकार्पण कर बोले PM मोदी- 2014 से पहले जैसे काम हो रहा था, उस तरह 2040 तक बनती सुरंग

बोले- मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला है

अटल टनल का लोकार्पण कर बोले PM मोदी- 2014 से पहले जैसे काम हो रहा था, उस तरह 2040 तक बनती सुरंग

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कुल्लू। पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने रोहतांग में आज (शनिवार) दुनिया की सबसे बड़ी ‘अटल टनल’ (Atal Tunnel) का लोकार्पण किया। पीएम मोदी ने टनल के साउथ पोर्टल पर लोकार्पण किया। बीआरओ (BRO) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने पीएम मोदी को टनल के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पीएम मोदी ने ‘अटल टनल’ का लोकार्पण करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है। आज सिर्फ अटल जी का ही सपना पूरा नहीं हुआ है। आज हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है। मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला है।

पहाड़ी समझ सकते हैं- पहाड़ पर 3-4 घंटे की दूरी कम होने का मतलब

उन्होंने आगे कहा, ‘अक्सर लोकार्पण की चकाचौंध में वो लोग कहीं पीछे रह जाते हैं, जिनके परिश्रम से ये सब संभव हुआ है। अभेद्य पीर पंजाल को भेदकर एक बहुत कठिन संकल्प को आज पूरा किया गया है।’ उन्होंने कहा कि इस महायज्ञ में अपना पसीना बहाने वाले, अपनी जान जोखिम में डालने वाले, मेहनतकश जवानों, इंजीनियरों और मजदूर भाई बहनों को मैं नमन करता हूं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस टनल से मनाली और केलॉन्ग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो ही जाएगी। पहाड़ के मेरे भाई-बहन समझ सकते हैं कि पहाड़ पर 3-4 घंटे की दूरी कम होने का मतलब क्या होता है। उन्होंने कहा, ‘लेह, लद्दाख के किसानों, बागवानों और युवाओं के लिए भी अब देश की राजधानी दिल्ली और दूसरे बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी।’

#AtalTunnel भारत के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देने वाली

उन्होंने कहा कि इस टनल से मनाली और केलांग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो ही जाएगी। पहाड़ के मेरे भाई-बहन समझ सकते हैं कि पहाड़ पर 3-4 घंटे की दूरी कम होने का मतलब क्या होता है। हमेशा से यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की मांग उठती रही है। लेकिन लंबे समय तक हमारे यहां बॉर्डर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट या तो प्लानिंग की स्टेज से बाहर ही नहीं निकल पाए या जो निकले वो अटक गए, लटक गए, भटक गए। उन्होंने आगे कहा कि #AtalTunnel भारत के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देने वाली है। ये विश्व स्तरीय बॉर्डर कनेक्टिविटी का जीता-जागता उदाहरण है। हिमालय का हिस्सा हो, पश्चिम भारत में रेगिस्तान का विस्तार हो या दक्षिण व पूर्वी भारत का तटीय इलाका, ये देश की सुरक्षा और समृद्धि के बड़े संसाधन है।

अटल सरकार जाने के बाद इस काम को भुला दिया गया था

पीएम ने कहा कि साल 2002 में अटल जी ने इस टनल के लिए अप्रोच रोड का शिलान्यास किया था। अटल जी की सरकार जाने के बाद, जैसे इस काम को भी भुला दिया गया। हालात ये थी कि साल 2013-14 तक टनल के लिए सिर्फ 1300 मीटर का काम हो पाया था। उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट बताते हैं कि जिस रफ्तार से 2014 में अटल टनल का काम हो रहा था, अगर उसी रफ्तार से काम चला होता तो ये सुरंग साल 2040 में जाकर पूरा हो पाती। आपकी आज जो उम्र है, उसमें 20 वर्ष और जोड़ लीजिए, तब जाकर लोगों के जीवन में ये दिन आता, उनका सपना पूरा होता। बक़ौल पीएम, ‘जब विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ना हो, जब देश के लोगों के विकास की प्रबल इच्छा हो, तो रफ्तार बढ़ानी ही पड़ती है। अटल टनल के काम में भी 2014 के बाद, अभूतपूर्व तेजी लाई गई।’

यह भी पढ़ें: Live : #Atal_Tunnel_Rohtang देश को समर्पित, PM Modi ने किया उद्घाटन

6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया

पीएम मोदी ने कहा कि नतीजा ये हुआ कि जहां हर साल पहले 300 मीटर सुरंग बन रही थी, उसकी गति बढ़कर 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गई। सिर्फ 6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया। पीएम मोदी ने बताया कि अटल टनल की तरह ही अनेक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया। लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी के रूप में सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण एयर स्ट्रिप 40-45 साल तक बंद रही। क्या मजबूरी थी, क्या दबाव था? पीएम ने कहा कि साल 2005 में ये आंकलन किया गया था कि ये टनल लगभग 950 करोड़ रुपये में पूरी हो जाएगी। लेकिन लगातार होने वाली देरी के कारण ये तीन गुना से भी ज्यादा, यानी करीब 3200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पूरी हुई है। कल्पना कीजिए कि 20 साल और लग जाते तो क्या स्थिति होती!

हिमालय क्षेत्र में अनेकों प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए

उन्होंने आगे कहा कि अटल जी के साथ ही एक और पुल का नाम जुड़ा है- कोसी महासेतु का। बिहार में कोसी महासेतु का शिलान्यास भी अटल जी ने ही किया था। लेकिन इसका काम भी उलझा रहा, अटका रहा। 2014 में सरकार में आने के बाद कोसी महासेतु का काम भी हमने तेज करवाया। बक़ौल पीएम मोदी, ‘बीते 6 वर्षों में पुरानी स्थिति को बदलने की दिशा में अभूतपूर्व प्रयास किया गया है। हिमालय क्षेत्र में, चाहे वो जम्मू-कश्मीर हो, कारगिल, लेह लद्दाख हो, उत्तराखंड हो या सिक्किम हो, अनेकों प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा चुके हैं और दर्जनों प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।’ पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार के फैसले साक्षी हैं कि जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं। देश हित से बड़ा, देश की रक्षा से बड़ा हमारे लिए और कुछ नहीं। लेकिन देश ने लंबे समय तक वो दौर भी देखा है जब देश के रक्षा हितों के साथ समझौता किया गया।

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