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इस बार ऊना के बागवानों को मालामाल करेगा “फलों का राजा”

इस बार  ऊना के बागवानों को मालामाल करेगा “फलों का राजा”

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ऊना। बागवानी विभाग को इस बार ऊना(Una)में आम की बंपर पैदावार होने की आस है। विभाग का अनुमान है कि इस बार आम( Mango)की लगभग 17 हजार मीट्रिक टन पैदावार हो सकती है। इस बार ऑन इयर सीजन होने के चलते आम के पेड़ फलों से लदे हुए है। जहां आम की फसल को देख किसानों के चेहरे खिले हुए है वहीं मानसून शुरू होते ही तेज आंधी और तूफ़ान से फलों की ड्रॉपिंग का डर भी सता रहा है।

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आम को फलों राजा कहा जाता है और बागबानी के लिहाज से आम ऊना जिला की मुख्य फसल है। इस बार जिला ऊना में आम की बंपर फसल हुई है। आंशिक विकट परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दें, तो आम के पेड़ों पर लहलहाते फलों को देखकर बागवानों के चेहरे खिले हुए हैं। बीते साल जहां आम की पैदावार बहुत कम हुई थी, वहीं अबकी बार ऑन ईयर सीजन( On year season) होने के चलते विभाग को जिले में करीब 17 हजार मीट्रिक टन से भी अधिक आम की फसल होने की उम्मीद है। बता दें कि जिला ऊना के सभी पांच ब्लॉकों में करीब 2300 हेक्टेयर भूमि पर आम की पैदावार होती है। जिला ऊना में आम की पांच प्रजाति प्रमुख है। इनमें दशहरी, लंगड़ा, अमरपाली, मलिका व देसी आम प्रमुख है। इसके अलावा भी अन्य प्रकार की प्रजातियां जिला में पाई जाती है।

देसी आम के आचार व आमचूर की डिमांड ज्यादा

ऊना के देसी आम की मांग हिमाचल (Himachal)समेत पंजाब में बहुतयात रहती है। इसकी खास वजह है कि ऊना के देसी आम से बने आचार व आमचूर की डिमांड ज्यादा होती है। बागवानी विभाग के विषय विशेषज्ञ केके भारद्वाज की माने तो आम की फसल के लिए एक साल ऑन ईयर होता है और एक साल ऑफ ईयर होता है। बागबानी अधिकारी इस दफा ऑन ईयर के चलते ऊना में आम की बम्पर पैदावार होने की उम्मीद जता रहे है। भारद्वाज ने बताया कि इस बार 17 हजार मीट्रिक टन पैदाबार की उम्मीद है जिसमें 10 हजार मीट्रिक टन देसी आम और 7 हजार मीट्रिक टन कलमी आम की पैदावार होने की संभावना है। बागबानी विभाग के विषय विशेषज्ञ केके भारद्वाज ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकारों द्वारा बागबानी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। जिसमें नए बगीचे लगाने के साथ साथ बागबानी से जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही है। वहीं फलों से लदे आम के पेड़ों को देख बागवानों के चेहरों पर भी ख़ुशी झलक रही है। लेकिन मानसून के दौरान तेज आंधी और तूफ़ान से आम की ड्रापिंग होने की संभावना को देखते हुए बागबानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी खींची हुई है। बागवानों की माने तो अगर मौसम ने साथ दिया तो उनके पेड़ो पर लगने वाले आम की फसल अच्छी होगी।

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