छोटी काशी महोत्सव में चंबा रूमाल, चप्पल व थाल के दीवाने हुए लोग

पहाड़ी चित्रकला के स्टॉल भी बने आकर्षण के केंद्र

छोटी काशी महोत्सव में चंबा रूमाल, चप्पल व थाल के दीवाने हुए लोग

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मंडी। छोटी काशी महोत्सव में प्रदेश की कला व संस्कृति से रूबरू करवाने को विभिन्न हस्तशिल्प व हस्तदस्तकारी से जुड़े स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें चम्बा थाल, चम्बा रूमाल, चम्बा चप्पल के साथ-साथ पहाड़ी चित्रकला इत्यादि शामिल है। भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश के इतिहास व संस्कृति से जुड़ी जानकारी को विभिन्न पुस्तकों के माध्यम से प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है। हिमाचल प्रदेश के पर्यटक स्थलों को प्रदर्शित करती हुई प्रदर्शनी भी आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।



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चंबा से आए परीक्षित और इंदू शर्मा ने अपने स्टॉल में चंबा रूमाल को प्रदर्शित किया है। इस बारे परीक्षित शर्मा का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध चंबा रूमाल कला एकमात्र ऐसी कला है जो दो शखा सिलाई की जाती है। चम्बा रूमाल लघु चित्रशैली और कढ़ाई का मिश्रण है तथा यह कला पूरी तरह से एक दूसरे पर निर्भर है। फाइन मसलीन, सिल्क व खद्दर के कपड़े पर होती है चम्बा रूमाल की दस्तकारी। है। परीक्षित शर्मा को लघु चित्रशैली के लिए वर्ष 2006 में जबकि इंदू शर्मा को कढ़ाई के लिए 2015 में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।


चंबा से आए अनिल कुमार और विनोद कुमार ने चम्बा चप्पल को लेकर स्टॉल प्रदर्शित किया है। चंबा चप्पल भी दस्तकारी का अनूठा नमूना है। पट्टू, बालू, मछली, पत्तू, नोकदार इत्यादि डिजाईन पर आधारित चम्बा चप्पल तैयार की जाती है ये सारे डिजाईन प्रकृति से लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह कला पुस्तैनी है व रियासत काल से इसे संजो कर रखा गया है तथा इसके प्रति लोगों में काफी रूझान देखने को मिल रहा है।

प्रदर्शनी में चंबा थाल पर उकेरी कलाकृतियां भी बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। प्रदर्शनी में शामिल होने आए 29 वर्षीय अंकित वर्मा का कहना है कि यह कला भी उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है तथा इसे सहेजने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी का भी त्याग कर दिया है। उन्होंने बताया कि चम्बा थाल के लिए पित्तल धातू का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्राचीन कला को जीवंत रखने पर विशेष बल दिया ताकि यह कला वर्तमान परिवेश में भी अपनी पहचान बनाए रखे। उन्होंने इस तरह के आयोजनों की सराहना की।

 

 

खजूर और चीड़ की पत्तियों से तैयार टोकरी, फलावर पोट इत्यादि उत्पाद भी महोत्सव में आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। सिरमौर के रेणुका जी से आए सुरेश शर्मा कहते हैं कि उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को लोगों में काफी उत्साह देखा गया है। पहाड़ी चित्रकला बारे लोगों को अवगत करवाने के लिए भी स्टॉल लगाया गया है जिसमें पहाड़ी लघु चित्रकला की विभिन्न कलाओं को प्रदर्शित किया गया है।

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