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अब मिलेगी किन्नौर के चिलगोजा व स्पीति के सीबकथॉर्न को नई पहचान

औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में गठित की जाएगी हिम जड़ी-बूटी समिति

अब मिलेगी किन्नौर के चिलगोजा व स्पीति के सीबकथॉर्न को नई पहचान

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हिमाचल सरकार प्रदेश के हरित आवरण को बढ़ाने व पर्यावरण संरक्षण( Environment protection) को प्राथमिकता दे रही है, जिसके लिए वन विभाग( Forest department) के माध्यम से अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के सफलतापूर्वक कार्यन्वयन से प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के साथ लोगों को आजीविका उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘हिमाचल प्रदेश वन पारितंत्र प्रबंधन और आजीविका सुधार परियोजना’ शुरू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। जापान इंटरनेशनल कॉपरेशन (जाइका) एजेंसी द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना पर वन विभाग द्वारा 800 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। 10 वर्षीय इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में वन वृद्धि, जैव-विविधता संरक्षण, संस्थागत क्षमता के सुदृढ़ीकरण के साथ ग्रामीण लोगों की आर्थिकी में सुधार करना है। इस परियोजना के लिए वर्ष 2020-21 के लिए 41.78 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। प्रदेश के 12 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न प्रजातियों के एक करोड़ से अधिक पौधे रोपित करने का लक्ष्य इस वित्त वर्ष में निर्धारित किया है, जिसे पूरा करने के लिए जाइका परियोजना के अंतर्गत एक करोड़ 35 लाख पौधे प्रदेश भर में विभिन्न नर्सरियों में तैयार किए गए हैं।


 

औषधीय पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा

परियोजना प्रदेश के 6 जिलों किन्नौर, शिमला, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और लाहुल स्पीति के 18 वन मंडलों के 16 वन परिक्षेत्रों में कार्यान्वित की जा रही है। परियोजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 81 ग्रामीण वन समितियां गठित की गई है। इस परियोजना के अंतर्ग जनजातीय क्षेत्र किन्नौर के चिलगोजा और स्पीति के सीबकथॉर्न (छरमा) जैसे औषधीय पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा। इन प्रजातियों के 35 हजार पौधे रोपित करने के लिए संबंधित वन मण्डल अधिकारियों को लगभग 10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जाएगी।
इस परियोजना के अन्तर्गत खराब वन क्षेत्रों को सघन वन बनाने हेतु पौधरोपण, चारागाह सुधार के कार्य, मिट्टी एवं जल संरक्षण हेतू कार्य, वनों का आग से बचाव, खरपतवार नष्ट करने के कार्य, जैव विविधता गलियारा पर प्रायोगिक परियोजना, जैव विविधता गणना के लिए बुनियादी अध्ययन, सामुदायिक आजीविका सुधार गतिविधियां, औषधीय पौधों पर आधारित आजीविका सुधार गतिविधियां शुरू की जाएगी, जिसके लिए राज्य स्तर पर हिम जड़ी-बूटी समिति का भी गठन किया जाएगा।

 

759 हेक्टेयर भूमि में लगाए जाएंगे पौधे

परियोजना में शामिल जिलों के प्रत्येक वार्ड के लिए एक सूक्ष्म योजना बनाई गई है और इस वर्ष 40 सूक्ष्म योजनाएं कार्यान्वित की जाएंगी। वर्ष 2020-21 के लिए 150 सूक्ष्म योजनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन योजनाओं के अन्तर्गत प्रत्येक वार्ड में 10 युवाओं को रोजगार प्रदान किया जाएगा। ग्रामीण वन समितियों द्वारा बनाई गई सूक्ष्म योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए इस परियोजना के अन्तर्गत 759 हेक्टेयर भूमि में पौधे रोपित किए जाएंगे। मानव वन्य प्राणी संघर्ष सम्बन्धी मामलों से निपटने के लिए 16 त्वरित कार्रवाई दल गठित किए गए हैं। प्रदेश की जैव विविधता की गणना के लिए सेटेलाइट और ड्रोन की मदद से सर्वेक्षण करवाए जा रहे हैं। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका में सुधार हेतु ‘जड़ी-बूटी सैल’ का गठन कर उसे वन समृद्धि जन समृद्धि योजना से जोड़ा जाएगा। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को रोजगार प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की वन सम्पदा का संरक्षण करना भी है। प्रदेश की जड़ी-बूटियों की भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैगिंग करने के साथ इनका प्रसंस्करण कर मार्केटिंग के लिए विशेष प्रबंधक भी नियुक्ति किए जाएंगे। प्रदेश के लोगों की सहभागिता बढ़ाने के साथ उनकी आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से 11 हिम जड़ी-बूटी सहकारी समितियों का गठन प्रस्तावित है। पशुओं के लिए चारे की कमी न हो इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए फ्रांस की मदद से हाइड्रोपाॅनिक तरीके से चरागाहें विकसित की जाएगी।

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