अब राजगढ़ से उठी भांग की खेती को लीगल करने की आवाज

स्थानीय जनता भांग पर लगे प्रतिबंध के विरुद्ध जताने लगी विरोध

अब राजगढ़ से उठी भांग की खेती को लीगल करने की आवाज

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राजगढ़। सिरमौर जिले (Sirmaur District) के राजगढ़ क्षेत्र से भांग की खेती (Cannabis Farming) को लीगल करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय जनता विभिन्न माध्यमों से भांग पर लगे प्रतिबंध के विरुद्ध अपना विरोध प्रकट कर रही है। लोगों का कहना है कि भांग का राजगढ़ (Rajgarh) और आसपास के क्षेत्र की संस्कृति में विशेष महत्व है। क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन मूड़ा और सिड़कु में भांग का विशेष रूप से प्रयोग होता है। भांग के बने लड्डू भी इस क्षेत्र में प्रचलित थे। पुराने समय में जब लोगों को दूर यात्रा पर जाना होता था तो वो भांग की बनी बेड़ेयो रोटी साथ ले जाते थे, जो स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होती थी। इसके अतिरिक्त भांग के औषधीय गुणों का भी आयुर्वेद में उल्लेख है। भांग ना केवल पाचनशक्ति सुधारता है अपितु बांझपन जैसे रोगों को भी ठीक करता है। इसके अतिरिक्त चटनी और कड़ी में भी भांग उपयोग में लाई जाती है।
एशिया पैसिफिक मास्टर्स गेम्स (Asia Pacific Masters Games) में पदक जीतने वाले क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय धावक (International Runner) ओमप्रकाश चौहान का कहना है कि भांग पर प्रतिबंध का कानून अंग्रेजों से प्रभावित है। जब देश के अन्य हिस्सों में औषधी के लिए भांग की वैध खेती हो सकती है, तो हिमाचल में क्यों नहीं। उन्होंने बताया कि कनेड़ा में और अमेरिका के कई प्रांतों में भांग को वैध घोषित किया जा चुका है और अन्य कई देशों में भी मांग जोर पकड़ रही है। क्षेत्र के समाजसेवी ठाकुर सुरजन सिंह और विनोद शर्मा कहते हैं कि सरकार स्वयं शराब बेचती है और उससे मुनाफा करती है। जबकि शराब से होने वाला नुकसान भांग से कहीं ज्यादा होता है। वैसे तो आजकल खांसी की दवा का प्रयोग भी नशे में हो रहा है, लेकिन इस कारण हम दवा बेचना बंद नहीं कर सकते। उसी तरह भांग को उसके अन्य उपयोगों के लिए पैदा किया जा सकता है और इसके नशे पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में क्षेत्र में भांग को वैध करने के लिए जन प्रतिनिधियों से बात की जाएगी।

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