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मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ Shimla में बोला हल्ला, किया प्रदर्शन

मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ Shimla में बोला हल्ला, किया प्रदर्शन

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शिमला। केंद्र व राज्य सरकारों की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मजदूरों द्वारा “भारत बचाओ दिवस” व किसानों द्वारा “किसान मुक्ति दिवस” मनाया गया, जिसमें प्रदेश के 11 जिलों के हज़ारों मजदूरों व किसानों ने अपने कार्यस्थलों, ब्लॉक व जिला मुख्यालयों पर केंद्र सरकार (Center Govt) की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन (Protest) किए। यह प्रदर्शन सीटू, इंटक, एटक सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, दर्जनों राष्ट्रीय फैडरेशनों व हिमाचल किसान सभा सहित सैंकड़ों किसान संगठनों के आह्वान पर किए गए।


राजधानी शिमला (Shimla) में डीसी ऑफिस पर हुए प्रदर्शन में लगभग पांच सौ मजदूरों, किसानों, महिलाओं, छात्रों व नौजवानों ने भाग लिया। इस प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, इंटक प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल मेहरा, पूर्ण चंद, युवा इंटक अध्यक्ष यशपाल, हिमाचल किसान सभा जिलाध्यक्ष सत्यवान पुंडीर, किसान नेता संजय चौहान, जयशिव ठाकुर, सीटू राज्य कमेटी सदस्य किशोरी ढटवालिया व अन्य ने संबोधित किया। प्रदेश भर में हुए प्रदर्शनों में श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मजदूरों का वेतन 21 हज़ार रुपये घोषित करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने पर रोक लगाने, किसान विरोधी अध्यादेशों को वापिस लेने, मजदूरों को कोरोना काल के पांच महीनों का वेतन देने, उनकी छंटनी पर रोक लगाने, किसानों की फसलों का उचित दाम देने, कर्ज़ा मुक्ति, मनरेगा के तहत दो सौ दिन का रोज़गार, हर  व्यक्ति को महीने का दस किलो मुफ्त राशन देने व 7500 रुपये देने की मांग की गई।

यह भी पढ़ें: ICDS, मिड-डे मील व NHM योजनाओं के निजीकरण का विरोध, बोला हल्ला

 

मजदूर व किसान विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचने की दी चेतावनी

ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के हिमाचल प्रदेश संयोजक डॉ कश्मीर ठाकुर व अन्य संगठन नेताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकारों को चेतावनी दी है कि वह मजदूर व किसान विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचे ले, अन्यथा मजदूर व किसान आंदोलन तेज होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के इस संकट काल को भी शासक वर्ग व सरकारें मजदूरों व किसानों का खून चूसने व उनके शोषण को तेज करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान में श्रम कानूनों में बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। केंद्र सरकार द्वारा 3 जून 2020 को कृषि उपज, वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020, मूल्य आश्वासन (बन्दोबस्ती और सुरक्षा) समझौता कृषि सेवा अध्यादेश 2020 व आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) 2020 आदि तीन किसान विरोधी अध्यादेश जारी करके किसानों का गला घोंटने का कार्य किया गया है। सरकार पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के लिए पूरे देश के संसाधनों को बेचना चाहती है। ऐसा करके यह सरकार देश की आत्मनिर्भरता को खत्म करना चाहती है।

 

कारखाना अधिनियम 1948 में तब्दीली से मजदूरों का होगा शोषण

हिमाचल प्रदेश सरकार भी इन्हीं नीतियों का अनुसरण कर रही है। कारखाना अधिनियम 1948 में तब्दीली करके हिमाचल प्रदेश में काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर बारह कर दिया गया है। इस से एक तरफ एक-तिहाई मजदूरों की भारी छंटनी होगी। वहीं, दूसरी ओर कार्यरत मजदूरों का शोषण तेज़ होगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में परिवर्तन से जहां एक ओर अपनी मांगों को लेकर की जाने वाली मजदूरों की हड़ताल पर अंकुश लगेगा। वहीं, दूसरी ओर मजदूरों की छंटनी की पक्रिया आसान हो जाएगी व उन्हें छंटनी भत्ता से भी वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने मजदूर व किसान विरोधी कदमों व श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलावों पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने सरकार को चेताया है कि अगर पूंजीपतियोंए नैगमिक घरानों व उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाकर मजदूरों-किसानों के शोषण को रोका ना गया तो मजदूर-किसान सड़कों पर उतरकर सरकार का प्रतिरोध करेंगे।

 

किसानों का रबी फसल का कर्ज किया जाए माफ

उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार कोरोना काल में सभी किसानों का रबी फसल का कर्ज माफ करे व खरीफ फसल के लिए केसीसी जारी करे। किसानों की पूर्ण कर्ज़ माफी की जाए। किसानों को फसल का सी 2 लागत से 50 फीसद अधिक दाम दिया जाए। किसानों के लिए “वन नेशन-वन मार्किट” नहीं बल्कि  “वन नेशन- वन एमएसपी” की नीति लागू की जाए। किसानों व आदिवासियों की खेती की ज़मीन कम्पनियों को देने व कॉरपोरेट खेती पर रोक लगाई जाए। उन्होंने मांग की है कि महिला शोषण पर रोक लगाई जाए, उनका आर्थिक शोषण बन्द किया जाए, नई शिक्षा नीति को वापस लिया जाए, शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण व केंद्रीकरण पर रोक लगाई जाए, बढ़ती बेरोजगारी पर रोक लगाई जाए, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।

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