जानें कैसे नशे की तरह डिजिटल लत का शिकार बना रहे टिकटॉक और पबजी

लगातार गैजेट्स का इस्‍तेमाल करने से दिमागी तौर पर बीमार हो रहे व्‍यस्‍क और बच्‍चे

जानें कैसे नशे की तरह डिजिटल लत का शिकार बना रहे टिकटॉक और पबजी

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नई दिल्‍ली। टिकटॉक और पबजी जैसे एक नशे की लत की तरह ही खतरनाक हो चुके हैं। इससे ना केवल व्‍यस्‍क बल्कि बच्‍चे भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों ने इलेक्‍ट्रानिक गैजेट्स को लगातार इस्‍तेमाल करने की आदत को डिजिटल लत का नाम दिया है, जो नशे की तरह ही मनोवैज्ञानिक दुष्‍प्रभाव छोड़े रही है। यह लत कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा इन खबरों से लगाया जा सकता है कि तमिलनाडु में टिकटॉक खेलने से रोकने पर एक महिला ने आत्‍महत्‍या कर ली, मध्‍यप्रदेश में लगातार छह घंटे पबजी खेलने वाले एक स्‍टूडेंट का दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इसी तरह देश भर से डिजिटल लत का शिकार लोगों द्वारा ऐसी हरकतें करने की खबरें देखने को मिल रही हैं, जिससे या तो वे जान को जोखिम में डाल रहे हैं या फि‍र दुर्घटना के चलते या आत्‍महत्‍या करके जान गवा रहे हैं।


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इस संबंध में मनोचिकित्‍सकों ने ऐसा करने वालों को सलाह दी है कि काम, जीवन की गतिविधियों और सामाजिक व्‍यस्‍तताओं के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में अगर जीवन का कोई एक कार्य छोड़ कर किसी ऐसे कार्य में निरंतर व्‍यस्‍त हो जाना जो हमारे जीवन का हिस्‍सा नहीं है, तो वह खतरनाक लत का कारण बन जाता है। वे सलाह देते हैं कि हर वयस्‍क को हर हफ्ते चार घंटे के डिजिटल डिटॉक्‍स को अपनाना होगा। इस दौरान उन्‍हें अपने फोन या किसी भी डिजिटल गैजेट का उपयोग नहीं करना है। अगर इस दौरान उसे कोई परेशानी नजर आती है तो यह बहुत ही चिंता की बात होगी। अब तक की रिसर्च से पता चला है कि गैजेट्स के आदी लोग हमेशा ही इसके बारे में सोचते रहते हैं और जब वे इनका उपयोग नहीं करने की कोशिश करते हैं तो अनिंद्रा या चिड़चिड़ापन उन पर हावी होने लगता है। ऐसे लोग अपनी साफ सफाई तक का ध्‍यान नहीं रख पाते और अपने परिवार व समाज में दोस्‍तों तक से बात करना बंद कर देते हैं। एक्‍सपर्टस की सलाह है कि जब आपका बच्‍चा मोबाइल स्‍क्रीन पर ज्‍यादा समय बिता रहा है तो उससे बात करें और डिजिटल गैजेट्स से संपर्क कम करने के लिए प्रेरित करें।

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