कहीं आपको तो नहीं चॉक और ये चीजें खाने की आदत, इस बीमारी से हो सकते हैं ग्रसित

मां का प्यार न मिलना भी हो सकता है इसका कारण

कहीं आपको तो नहीं चॉक और ये चीजें खाने की आदत, इस बीमारी से हो सकते हैं ग्रसित

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नई दिल्ली। हम में कई लोग होते है जिन्हें ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) की परेशानी होती है। लोग तभी चॉक मिट्टी या नाख़ून खाते हैं जब उनके शरीर में किसी खनिज की कमी होती है। इस परेशानी को पिका या मनोबीमारी (Pika) भी कहा जाता है। इसमें इंसान उस चीज को खाना पसंद करता है जो आमतौर पर खाने लायक नहीं होती। लेकिन इसका मुख्यता कारण शरीर में खनिजों की कमी को भी नहीं कह सकते हैं। इसके कुछ और भी कारण हो सकते हैं। चलिए जानते हैं क्या हैं वो कारण,….


बता देंम, पिका लैटिन शब्द ‘फ़ॉर मैगपाई’ से बना है, यह एक ऐसे पक्षी का नाम है जो कुछ भी खा सकता है। पिका से वे लोग भी पीड़ित हो सकते हैं, जिनके साथ बचपन में कोई बुरा हादसा हुआ हो, जैसे-मां का प्यार न मिलना, माता-पिता का अलगाव, उपेक्षा, उत्पीड़न आदि। पिका से पीड़ित व्यक्ति के केस को पूरी तरह समझने के लिए सिर्फ़ पौष्टिक तत्वों की कमी की जांच ही नहीं, बल्कि उसके मानसिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि को भी समझना ज़रूरी है। इस तरह के नॉन फ़ूड आइटम्स खाने से गले में अवरोध के अलावा क्रॉनिक कब्ज़ की समस्या भी हो सकती है। अगर व्यक्ति एक महीने से अधिक समय तक ऐसी चीज़ें खाता है तो वह पिकाग्रस्त कहा जा सकता है।

हम में कई लोग होते है जिन्हें ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) की परेशानी होती है। लोग तभी चॉक मिट्टी या नाख़ून खाते हैं जब उनके शरीर में किसी खनिज की कमी होती है। इस परेशानी को पिका या मनोबीमारी (Pika) भी कहा जाता है। इसमें इंसान उस चीज को खाना पसंद करता है जो आमतौर पर खाने लायक नहीं होती। लेकिन इसका मुख्यता कारण शरीर में खनिजों की कमी को भी नहीं कह सकते हैं। इसके कुछ और भी कारण हो सकते हैं। चलिए जानते हैं क्या हैं वो कारण,….

बता देंम, पिका लैटिन शब्द ‘फ़ॉर मैगपाई’ से बना है, यह एक ऐसे पक्षी का नाम है जो कुछ भी खा सकता है। पिका से वे लोग भी पीड़ित हो सकते हैं, जिनके साथ बचपन में कोई बुरा हादसा हुआ हो, जैसे-मां का प्यार न मिलना, माता-पिता का अलगाव, उपेक्षा, उत्पीड़न आदि। पिका से पीड़ित व्यक्ति के केस को पूरी तरह समझने के लिए सिर्फ़ पौष्टिक तत्वों की कमी की जांच ही नहीं, बल्कि उसके मानसिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि को भी समझना ज़रूरी है। इस तरह के नॉन फ़ूड आइटम्स खाने से गले में अवरोध के अलावा क्रॉनिक कब्ज़ की समस्या भी हो सकती है। अगर व्यक्ति एक महीने से अधिक समय तक ऐसी चीज़ें खाता है तो वह पिकाग्रस्त कहा जा सकता है।

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