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Scholarship Scam: हाईकोर्ट ने खारिज की हितेश गांधी की जमानत याचिका

Scholarship Scam: हाईकोर्ट ने खारिज की हितेश गांधी की जमानत याचिका

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शिमला। 250 करोड़ रुपए के छात्रवृत्ति घोटाले (Scholarship Scam) के आरोपी व ऊना (Una) के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी की जमानत याचिका हाईकोर्ट (High Court) ने खारिज कर दी है। 4 जनवरी को हिमाचल में 250 करोड़ के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई (CBI) ने पहली बार तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार लोगों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) की नवांशहर शाखा के हेड कैशियर एसपी सिंह और ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी के नाम शामिल हैं। जांच में राज्टा की भूमिका संदिग्ध मिली है। आरोप है कि वह घोटाले वाले समय के दौरान शिक्षा मुख्यालय में उस सीट पर तैनात रहा है, जहां से छात्रवृत्ति वितरण का काम संचालित होता था।

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सीबीआई ने 9 मई 2019 को एफआईआर दर्ज की थी

पिछले कुछ समय में सीबीआई ने ऊना के केसी इंस्टीट्यूट पर छापा मारकर भी दस्तावेज सीज किए थे। वहीं, बैंक के हेड कैशियर के लिए कहा जा रहा है कि वह बैंक खातों में मोबाइल नंबर व अन्य जानकारियों को लेकर फर्जीवाड़े में शामिल था। हिमाचल सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने 9 मई 2019 को एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। पांच दिन बाद ही हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर छापे मारे गए। यह कार्रवाई हिमाचल में शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा (Chamba) और कांगड़ा (Kangra) के अलावा करनाल, मोहाली (Mohali), नवांशहर, अंबाला और गुरदासपुर स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई। साथ ही बैंकों में भी छापा मारा था।

मंत्री रामलाल मार्कंडेय की शिकायत पर जांच के बाद हुआ था खुलासा

उल्लेखनीय है कि मंत्री रामलाल मार्कंडेय की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की तो साल 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख एससी (SC), एसटी और ओबीसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई। इसी दौरान 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति बंटी, जिसमें 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल थे। निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19915 को चार मोबाइल (Mobile) फोन नंबरों से जुड़े बैंक खातों में राशि जारी की गई। मामला बड़े शिक्षण संस्थानों व दूसरे राज्यों से भी जुड़ा था, ऐसे में सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

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