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कुल्लूः Lockdown में चलीं नहीं इलेक्ट्रिक बसें, भरना पड़ा 10 लाख से ज्यादा का बिजली बिल

कुल्लूः Lockdown में चलीं नहीं इलेक्ट्रिक बसें, भरना पड़ा 10 लाख से ज्यादा का बिजली बिल

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कुल्लू। कोरोना काल के दौरान एचआरटीसी (HRTC) कुल्लू डिपो को 440 वोल्ट का तगड़ा झटका लगा है। कुल्लू डिपो को बाशिंग इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट बंद होने के बावजूद भी पिछले 3 माह में 10 लाख से अधिक बिल का भुगतान करना पड़ा है। बिजली बिल को लेकर लिखित में जवाब भी मांगा गया, लेकिन बिजली बोर्ड परिवहन विभाग को संतुष्ट जवाब नहीं दे पाया है। ऐसे में अब परिवहन विभाग ने इस मामले में कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। वहीं, बिजली बोर्ड का तर्क है कि बिजली बिल एचटी लाइन से बिजली ट्रांसफार्मर को भेजी बिजली के आधार पर दिया गया है। ऐसे में अब परिवहन विभाग और बिजली बोर्ड आमने-सामने आ गए हैं।

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आरएम कुल्लू डीके नारंग ने बताया कि 23 मार्च को कोरोना लॉकडाउन (Lockdown) व कर्फ्यू के बाद इलेक्ट्रिक बसों की आवाजाही बंद हो गई थी, जिसके बाद इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन भी बंद था। इसके बावजूद बिजली बोर्ड ने डेढ़ माह का 6 लाख 19 हजार रुपए का बिल दिया। चार्जिंग स्टेशन बंद होने के बाद भी टेंटेटिव बिल दिया। इसके बाद फिर अगले माह 1 माह का 4 लाख बिजली का बिल दिया गया। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड की तरफ से एक नोटिस भेजकर बिल जमा करने का आग्रह किया था, जिसके बाद 10 लाख 19 हजार रुपए जमा करवाए गए। उन्होंने कहा कि इतना ज्यादा बिल क्यों दिया है इसको लेकर बोर्ड से लिखित में जवाब मांगा है, लेकिन अभी बिजली बोर्ड ने संतुष्ट जवाब नहीं दिया है।

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विभाग ने अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि कुल्लू डिपो के मनाली में भी दो ट्रांसफॉर्मर हैं, जिसका बिल डेढ़ से दो लाख रुपये आता है। ऐसे में बाशिंग चार्जिंग प्वाइंट का बिल 5 गुणा ज्यादा बिल आया है, जिससे परिवहन विभाग को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर परिवहन विभाग ने बिजली विभाग से समाधान करने की मांग की है। उम्मीद है कि इस समस्या का हल होगा। वहीं, बिजली बोर्ड के अधिशाषी अभियंता ने कहा कि एचटी लाइन से दिए गए व्यावसायिक कनेक्शन का बिल ट्रांसफार्मर को सप्लाई होने वाली बिजली के आधार पर दिया जाता है। चाहे उपभोक्ता बिजली का उपयोग करें या ना करे। इसी आधार पर बिजली बिल दिया गया है।

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