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हिमाचली चखेंगे महाराष्ट्र के Banana का स्वाद, एक-एक पौधे पर सैकड़ों फल देख किसानों के चेहरे खिले

बागबानी विभाग ने हमीरपुर के अणुकंला के चार किसानों को दिए थे महाराष्ट्र से लाए केले के पौधे

हिमाचली चखेंगे महाराष्ट्र के Banana का स्वाद, एक-एक पौधे पर सैकड़ों फल देख किसानों के चेहरे खिले

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हमीरपुर। महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे गर्म और पानी से भरपूर राज्यों में उगने वाले पौष्टिक केले का स्वाद अब हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में भी लोगों को मिलेगा। हमीरपुर के साथ लगते ग्राम पंचायत अणुकलां में महाराष्ट्र से लाए गए पौधों पर सैंकड़ों के हिसाब से केले लगने शुरू हो गए हैं। बता दें कि बागवानी विभाग (Horticulture Department) ने डेढ साल पहले सूरत और महाराष्ट्र से केले के छाटे-छोटे पौधे (Banana Plants) मंगवाकर उन्हें हमीरपुर जिला के वातावरण में ट्रायल के तौर पर लगाया था जो कि आज पूरी तरह सफल हो गया है। बागबानी विभाग हमीरपुर (Hamirpur) ने ट्रायल तौर पर चार किसानों को यह पौधे वितरित किए थे। इन पौधों पर अब एक दो या तीन नहीं अपितु 35 से 40 दर्जन केले लग रहे हैं। जिन्हें देखकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है।

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आपको बता दें कि केले की खेती लगभग 4000 वर्ष पहले मलेशिया में शुरु हुई, लेकिन आज के दौर में भारत, विश्व का सबसे अधिक केला उत्पादक देश बन गया है। भारत में केले की खेती खासतौर पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, बिहार, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा होती है। केला को पौष्टिक रूप से सोने की खान माना जाता है। यह दिमाग और शरीर दोनों के लिए अच्छा रहता है। केले में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन बी, विटामिन सी, मैंगनीज और पोटेशियम आदि पौष्टिक तत्व पाए जाते है जो कि शरीर के लिए बहुत लाभदायक होते हैं।

 

 

18 महीनों में तैयार हो जाती है केले की फसल

सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात सतपाल सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष बागवानी विभाग के एचओडी (HOD) प्रताप सिंह ने हमीरपुर के वातावरण को देखते हुए सूरत और महाराष्ट्र (Maharashtra) से केले के छोटे-छोटे पौधे मंगवाए थे और ट्रायल के तौर पर हमीरपुर जिला के 4 किसानों को यह पौधे उगाने के लिए दिए गए। आज एक साल बाद इन पौधों पर केले लगना शुरू हो गए हैं और एक पौधे पर सैंकड़ों के हिसाब से केले लगे है। उन्होंने बताया कि इन केले के पौधों पर किसी भी प्रकार के कैमिकल का छिड़काव नहीं किया गया है। ये पौधे प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए पौधे हैं। उन्होंने कहा कि केले की खेती लगभग 18 महीनों में तैयार हो जाती है। हिमाचल के ठंडे मौसम के कारण केले की फसल में थोड़ी देरी हो रही है।

ग्रामीणों को अच्छी आमदन की जगी उम्मीद

किसान (Farmer) की पत्नी अंजना कुमारी, सतपाल के पिता दुनी चंद, बुजुर्ग महिला शीला देवी और ग्रामीण महिला सुदेश ने बताया कि बागबानी का शौक और विभाग के सहयोग से केले के पौधे लगाए थे। अब केले की फसल (Crop) को देख कर अच्छे इनकम की उम्मीद जगी है। उन्होंने किसानों को भी सलाह दी है कि खाली पड़ी भूमि पर केले के पौधों को लगाकर अच्छी आमदन की जा सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि केले के पौधों पर इतने केले पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने कहा कि केले की फसल देख कर हर कोई हैरान है।

 

 

क्या कहता है उद्यान एवं बागबानी विभाग

उद्यान एवं बागबानी विभाग के एचओडी प्रताप सिंह ने बताया कि बागबान के शौकीन सपताल की डिमांड आने के बाद ट्रायल के तौर पर अणुकलां में केले के पौधे महाराष्ट्र से मंगवाकर लगाए गए हैं जो कि अब काफी अच्छे फल देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस केले की फसल में किसी भी प्रकार की कैमिकल युक्त खाद का इस्तेमाल नहीं किया है और अब यह फसल तैयार हो गई है, जिससे आने वाले समय में हमीरपुर में और जगह पर भी अब केले की फसल तैयार हो सकेगी।

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