इनवेस्टर्स मीट: पर्यटन क्षेत्र के निवेशकों को सरकार ने दी बड़ी राहत, जानें

अनिवार्यता प्रमाण पत्र के दिशा निर्देशों में किया बदलाव

इनवेस्टर्स मीट: पर्यटन क्षेत्र के निवेशकों को सरकार ने दी बड़ी राहत, जानें

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शिमला। धर्मशाला में होने वाली इनवेस्टर्स मीट (Investors Meet) से पहले सरकार (Government) ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने के इच्छुक उद्मियों (investors of tourism sector) को राहत प्रदान की है। उद्यमियों को राहत प्रदान करते हुए सरकार ने प्रोजेक्टों की अनिवार्यता प्रमाण पत्र (Compulsory certificate) के दिशा निर्देशों में बदलाव किया है। बदलाव के बाद पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने वाले निवेशकों को अपना प्रोजेक्ट पर्यटन विभाग के पास प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए निवेशक को अनिवार्यता प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी।



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अलबत्ता एक मर्तबा पर्यटन प्रोजेक्ट के लिए भूमि मुजारा कानून की धारा 118 के तहत अनुमति मिलने के बाद खरीदी गई जमीन का लैंड यूज बदलने की स्थिति में अनिवार्यता प्रमाण पत्र रद्द समझा जाएगा। उल्लेखनीय है कि धर्मशाला में 7 व 8 नवंबर को होने वाली इनवेस्टर्स मीट से पहले सरकार ने करीब 81 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों को लेकर एमओयू किए हैं। इनमें से करीब 13 हजार करोड़ के एमओयू पर्यटन क्षेत्र में निवेश को लेकर हुए हैं। इनवेस्टर्स मीट के दौरान अभी पर्यटन क्षेत्र में और एमओयू होने की उ मीद है। जाहिर है कि हिमाचल में पर्यटन उद्योग में निवेशकों का खासा रुझान है। लिहाजा सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर अनिवार्यता प्रमाण पत्र की शर्त में बदलाव किया है।


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वर्तमान में निवेशकों कोन सिर्फ प्रोजेक्ट के लिए भूमि मुजारा कानून की धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की अनुमति पहले लेनी पड़ती थी, बल्कि आईपीएच व बिजली बोर्ड समेत कई विभागों से भी एनओसी मिलने के बाद ही अनिवार्यता प्रमाण पत्र मिल पाता था। मगर संशोधन के बाद प्रोमोटर निदेशक पर्यटन के पास प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर अनिवार्यता प्रमाण पत्र लेगा। अनिवार्यता प्रमाण पत्र प्रोजेक्ट प्रस्तुत होने के दस दिनों के भीतर मिलेगा। साथ ही साथ निवेशक भूमि मुजारा कानून की धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की अन्य औपचारिकताओं को पूरा करेगा। मगर जमीन खरीदने की अनुमति मिलने के बाद किसी दूसरे प्रोजेक्ट के लिए भूमि का उपयोग निवेशक नहीं कर सकेंगे। जाहिर है कि निवेशकों को अनिवार्यता प्रमाण पत्र के लिए विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे। प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर अनिवार्यता प्रमाण पत्र मिलेगा।

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