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Kullu Dussehra: इस बार देवताओं को नहीं भेजा जाएगा निमंत्रण और ना मिलेगा नजराना

भगवान रघुनाथ जी रथ यात्रा में जिला के सात ही देवता ही कर सकेंगे शिरकत

Kullu Dussehra: इस बार देवताओं को नहीं भेजा जाएगा निमंत्रण और ना मिलेगा नजराना

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कुल्लू। शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा (International Kullu Dussehra) का शुभारंभ 25 अक्टूबर को भगवान श्री रघुनाथ जी रथ यात्रा निकलने के साथ होगा। 31 अक्टूबर को इस सात दिवसीय ऐतिहासिक उत्सव का लंकादहन के साथ समापन होगा। इस बार भगवान रघुनाथ जी रथ यात्रा में जिला के सात ही देवताओं को शामिल किया जाएगा तथा रथ यात्रा में भी 100 से अधिक लोग भाग नहीं लेंगे। रथ यात्रा में केवल वहीं व्यक्ति भाग लेगा, जिसका कोरोना (Corona) टेस्ट नेगेटिव होगा और भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों को प्रवेश पास जारी किए जाएंगे। इस बार देवताओं को ना तो कोई निमंत्रण दिया जाएगा और ना ही नजराना प्रदान किया जाएगा। गत वर्ष दशहरा उत्सव में घाटी के 300 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया था, जिनमें से 280 देवताओं ने शिरकत की थी।

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सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस बार कोरोना का प्रभाव पूरी तरह से दशहरा के आयोजन पर नजर आज रहा है। इस संबंध में शुक्रवार को परिधि गृह कुल्लू में पत्रकारों से दशहरा उत्सव के आयोजन की तैयारियों के बारे में वार्तालाप करते हुए शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर (Govind Singh Thakur) ने कहा कि उत्सव के दौरान परंपराओं का भव्य व सूक्ष्म रूप से निर्वहन किया जाएगा और इसका लाइव प्रसारण लोग घर बैठे देख सकेंगे।

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गोविंद ठाकुर ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में धर्मिक तथा अन्य अन्य बड़े-2 आयोजनों को या तो स्थगित कर दिया गया या फिर सूक्ष्म रूप से मनाया गया, ताकि कोरोना के संक्रमण से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि जान है तो जहान है और प्रत्येक व्यक्ति को कोरोना संक्रमण से स्वयं भी बचना है और दूसरों को भी बचाना है। उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरे का अलग महत्व है। देवी-देवताओं का इतना भव्य और विशाल महामिलन और कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता है। कुल्लू का दशहरा महज एक उत्सव नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।उन्होंने कहा कि कुल्लू के समस्त देव समाज की सहमति के उपरांत इस बार दशहरा के स्वरूप को सूक्ष्म किया गया है। इससे परंपरा की भी बेहतर ढंग से निर्वहन होगा और समाज तथा दुनिया में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना का संकट आने वाले कुछ महीनों में पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और आगामी वर्ष कुल्लू दशहरा को इसकी ऐतिहासिकता के अनुरूप भव्यता व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। डीसी डॉ. ऋचा वर्मा भी इस दौरान शिक्षा मंत्री के साथ मौजूद रहीं।

 

 

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