चंबाः बॉर्डर पर घुसपैठ के अंदेशे से प्रो-एक्टिव हुई आईआरबी

रिज़र्व पुलिस करती है सरहद की निगेहवानी

चंबाः बॉर्डर पर घुसपैठ के अंदेशे से प्रो-एक्टिव हुई आईआरबी

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चंबा। जिले की जम्मू से लगती सीमांत चोटियों पर हुई भारी बर्फबारी ने जिले की आईआरबी पुलिस पोस्टों को भी प्रो-एक्टिव होने को मजबूर कर दिया है। वर्तमान में एक और जहां भारी बर्फबारी से घुसपैठ का अंदेशा रहता है तो वहीं इस दौरान निरीक्षण चौकियों का नीचे शिफ्ट होना भी आतंकियों के लिए मददगार साबित हो सकता है। इस अंतर्राज्यीय सीमा में चंबा के साथ डोडा तथा भद्रवाह जिलों के अलावा पांगी से लगने वाला गुलाबगढ़ क्षेत्र शामिल है। चंबा के सीमांत स्थानीय लोगों की जम्मू के सीमांत गांवों के लोगों से रिश्तेदारी और जम्मू के बकरवाल समुदाय का रोजगार के लिए दोनों और आना जाना लगा रहता है। बताते चलें कि देश का अशांत जम्मू-कश्मीर राज्य जिला चंबा से करीब 216 किलोमीटर लंबी सरहद सांझी करता है।


मिंजर की खुशियां बदल गई थीं मातम में, 35 की कर दी थी हत्या

जब पूरा जिला मिंजर की खुशियां मना रहा था तो 3 अगस्त 1998 को कालाबन तथा सतरुंडी नरसंहार जिसमें 35 हिंदुओं की हत्या जम्मू राज्य से आए आतंकियों ने की थी, इसी सरहद का अतीत रहा है। यही वजह है कि यहां शिफ्टेड निरीक्षण चौकियों को प्रो-एक्टिव रहना पड़ता है। हालांकि पिछले 20 सालों से कोई घुसपैठ न होने की बात कहने वाली पुलिस बर्फबारी के दौरान घुसपैठ के खतरे को कम बताती है। जिले की सुरक्षा की दृष्टि से करीब 216 किलोमीटर लंबे इस संवेदनशील बॉर्डर एरिया में इंडियन रिज़र्व पुलिस बटालियन के जवान करीब 1 दर्जन से ज्यादा सुरक्षा चौकियों पर तैनात हैं।

हालांकि ये चौकियां बर्फबारी से पूर्व ही शिफ्ट कर निचले क्षेत्रों में आ जाती है तथा वहीं से सरहद की हलचल पर पैनी नजर रखनी होती है। गुल्लू की मंडी को भांदल और सतरूंडी चेक पोस्ट को बैरागढ़ में शिफ्ट कर दिया जाता है। गढ़माता, संसारीनाला, खुंडी मराल, ब्रुइला, मनसाधार और नोडल धार चौकियों को भी इसी तरह निचले क्षेत्रों में शिफ्ट कर दिया जाता है। हरेक चौकी में 20 एसपीओ, एक दर्जन कांस्टेबल समेत लगभग 35 से 40 की टीम मुस्तैद रहती है।

2012 तक आईटीबीपी के पास था जिम्मा

इससे पहले साल 2012 तक इस सीमा की सुरक्षा का जिम्मा आईटीबीपी के पास था। इसके बाद आईटीबीपी के यहां की सुरक्षा से हटने के बाद से यहां आईआरबी तैनात है। सर्दियों के मौसम में सीमांत क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होती है। ऐसे में शून्य से नीचे के तापमान में यहां टिकना नामुमकिन होता है। ऐसे में चंबा-जम्मू-कश्मीर की सीमा पर तैनात आईआरबी के जवानों को बर्फबारी शुरू होने से पूर्व निचले क्षेत्रों में बुला लिया जाता है।

मौसम खुलते ही इन्हें फिर से सीमा पर भेज दिया जाता है। उधर, इस संदर्भ में जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंबा रमन शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने चौकियों की शिफ्टिंग की पुष्टि करते हुए बताया कि आईआरबी पोस्ट्स में जम्मू की और अपेक्षाकृत अधिक बर्फबारी से मानवीय जीवन असंभव हो जाता है। वहीं भारी बर्फबारी के बीच घुसपैठ की कम संभावना जताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की आईआरबी फॉर्स सरहद की संवेदनशीलता के चलते हमेशा ‘ एट वॉच’ पर रहती है।

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