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पैर के छाले रोक रहे कदमों को, खाने से ज्यादा इन्हें ‘चप्पल’ की है जरूरत

कोरोना संकट के बीच घर लौट रहे प्रवासियों की दास्तां आंखों को कर रही नम

पैर के छाले रोक रहे कदमों को, खाने से ज्यादा इन्हें ‘चप्पल’ की है जरूरत

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पैर के छाले इतने जालिम हो चुके हैं कि वह घर की तरफ बढते कदमों को रोक रहे हैं। पैदल चल-चलकर चप्पलें घिस गई तो पैरों में छाले ही नहीं पड़े बल्कि खून भी रिसने लगा है। आज उन्हें खाने से ज्यादा चप्पल की जरूरत है। ये कहानी है उन प्रवासियों की जो इस महामारी के बीच बस घर जाने की टीस में किसी तरह घिसटते-घिसटते सैकडों किलोमीटर का पैदल सफर तय कर चुके हैं,लेकिन अब पैरों के छाले उन्हें घर से दूर किए हुए लग रहे हैं। गुजरात के सूरत (Surat in Gujarat) से चलकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur in Uttar Pradesh) तक का सफर तय करना है इन्हें।


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श्रमिक स्पेशल ट्रेन नहीं मिली,तो निकले पैदल

कोरोना संकट के बीच जब श्रमिक स्पेशल ट्रेन (Shramik Special Train) चलने की बात सामने आई तो इन्होंने भी रिजर्वेशन कराया। कहते हैं कि एक हफ्ते तक इंतजार किया, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो पैदल ही घर जाने का फैसला किया। हुआ ये कि सूरत से पैदल चलते-चलते उनकी चप्पलें घिस गईं, नतीजन पैरों में छाले पड़ गए और उनसे खून भी रिसने लगा। जिसके चलते आगे बढना अब मुश्किल लग रहा है,जब तक चप्पल नहीं मिल जाती। इस हालात में उन्हें पेट की भूख की, कतई भी परवाह नहीं है,बस उन्हें कुछ चाहिए तो वह चप्पल। इनके पैर की हालत देख आंखें नम हो रही हैं।

सूरत की कपड़ा मिल में करते थे काम

सूरत की कपड़ा मिल में काम करने वाले ये प्रवासी उत्तर प्रदेश के लखनऊ (Lucknow) तक का सफर पैदल ही तय कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही उनकी चप्पलों (Slippers) ने उनका साथ छोड़ दिया था। उसके बाद प्रवासियों का ये एक समूह नंगे पांव ही आगे चलता रहा। अभी इन्हें 300 किलोमीटर तक का सफर तय करना है। इनका कहना है कि लोग उन्हें रास्ते में भोजन और पानी की पेशकश कर रहे हैं लेकिन उनके लिए चप्पलें अब एक बड़ी समस्या बन गए हैं। वह कहते हैं कि हम एक या दो दिन भोजन के बिना चल सकते हैं, लेकिन इस स्थिति में बिना चप्पलों के चलना अब नामुमकिन है।

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स्थानीय बाशिंदें लगे चप्पलें बांटने

रास्ते में उन्हें किसी ने पैसे भी देने चाहे,लेकिन प्रवासियों ने उन्हें भी लेने से मना कर दिया। कारण ये रहा कि चप्पल खरीदेंगे कहां से। कहा जा रहा है कि इनकी ये हालत देख एक स्थानीय नागरिक लखनऊ-बाराबंकी सड़क पर प्रवासियों (Migrants) को चप्पल बांट रहे हैं। उन्होंने अब थोक में चप्पलें खरीदी हैं और शुक्रवार से इन्हें बांटने का काम शुरू किया है। ताकि,किसी तरह ये प्रवासी अपने घर तक पहुंच सके।

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