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प्रदेश के वित्तीय हालातों पर Mukesh ने घेरी जयराम सरकार, श्वेत पत्र जारी करने की उठाई मांग

प्रदेश के वित्तीय हालातों पर Mukesh ने घेरी जयराम सरकार, श्वेत पत्र जारी करने की उठाई मांग

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शिमला। प्रदेश की जयराम सरकार ने राज्य को वित्तीय अराजकता में धकेल दिया है और अब विकास कार्यों के लिए बजट में सीलिंग लगाई जा रही है। इन अढ़ाई सालों में डबल इंजन की सरकार ने प्रदेश में फिजूलख़र्ची पर कोई लगाम नहीं लगाई और प्रदेश के वित्तीय हालात (Financial circumstances)  तहस-नहस कर दिए। यह आरोप नेता प्रतिपक्ष, मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh Agnihotri) ने जयराम सरकार पर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सीएम जयराम (Jai Ram Govt) को वित्तीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए “श्वेत पत्र” जारी करना चाहिए। प्रदेश सरकार कांग्रेस को कोसने की बजाय इन अढ़ाई सालों की अपनी नाकामियों का कच्चा चिट्ठा जनता के समक्ष रखे। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से भी प्रदेश सरकार कोई मदद हासिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि कोरोना से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल हुई है।

100 दिन के कोरोना काल में सरकारी तंत्र ने तोड़ा दम

जयराम सरकार ने  कांग्रेस व बीजेपी विधायकों (Congress & BJP MLA) की संयुक्त मांग के बावजूद भी विधान सभा का विशेष सत्र नहीं बुलाया। 100 दिन के कोरोना काल के बाद सरकारी तंत्र पूरी तरह दम तोड़ गया है और अब जनता को इस कोराना काल में अपने हाल में छोड़ दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आलम यह है कि सिर्फ़ फिकस्ड खर्चों के लिए सरकार व्यय कर रही है और विकास के कार्यों के लिए पैसा नहीं है। इसलिए सभी विभागों को उपलब्ध बजट के 35 फीसदी से ज्यादा ख़र्चा न करने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि विभागों के पास पड़े 12 हजार करोड़ रुपये को व्यय करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राशन की स्कीम से लाखों लोगों को वंचित करके सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये बचाने का प्रयास खेदजनक है। बिजली की सब्सिडी (Electricity Subsidy) से भी लाखों लोगों को महरूम किया जा रहा है।

 

सरकार रिक्त पड़े मंत्रियों के पदों पर नहीं कर पाई तैनाती

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस सरकार का आधा सफर हो चुका है और अभी भी अधिकांश महकमें सीएम खुद संभाले हुए हैं। स्वास्थ्य, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले व ऊर्जा जैसे महकमों के मंत्री हटने के बाद भी सरकार रिक्त पड़े मंत्रियों के पदों पर तैनाती नहीं कर पाई। जबकि कोरोना (Corona) काल में इन विभागों की मोनिटरिंग के लिए मंत्री जरूरी थे। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग में घोटाले हुए और दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम मंहगे हुए। विधायक निधि पर चाबुक चलाकर बीजेपी सरकार ने राजनीति की है, इसे तत्काल बहाल करने की जरूरत है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी विधायक यह मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राज्य की सीमाओं को अन्य राज्यों के लागों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है जिससे प्रदेश में कोरोना महामारी के फैलने का खतरा और बढ़ गया है। इसलिए सरकार इस पर पुनर्विचार करे और मात्र केंद्र के फरमान पर अमल करने के बजाय अपनी भौगोलिक परिस्थिति ध् वातावरण को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।

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