जन्नत सी मशहूर खजियार , बॉलीवुड फिर भी हुआ दूर

दुनिया के 160 मिनी स्विटज़रलैंड में शुमार खज्जियार

जन्नत सी मशहूर खजियार , बॉलीवुड फिर भी हुआ दूर

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पुनीत शर्मा/ चंबा। सुनहरी धुप में जिसका हुस्न खिल उठता है और यायावरों को जहां सकून मिलता है कुदरत का वो करिश्मा है खजियार। यही वजह है कि दुनिया के 160 मिनी स्विट्ज़रलैंड में खजियार का नाम भी शुमार है। हिमाचल भर में जहां खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, वहां खजियार को यह तगमा मिलने के पीछे इस झील की दिलकश सुंदरता है। बावजूद इसके बॉलीवुड को यहां शूटिंग के लिए आकर्षित न कर पाना एक बड़ी नाकामी दिखती है जबकि अतीत में कई बॉलीवुड फ़िल्में यहां फिल्माई गई हैं, जिसमें वजूद, गदर, हिमालय पुत्र तथा लुटेरा शामिल हैं। वीकेंड पर यहां प्रदेश के अलावा जम्मू तथा पंजाब के सैलानी भी कुदरत को निहारने पहुंचते है। यहां घुड़सवारी का अपना क्रेज है तो वहीं रोलिंग बॉल तथा मैदान में ही पैराग्लाईडिंग की छोटी उड़ान रोमांचक है। पैराग्लाइडिंग को लेकर जारी प्रयास सिरे चढ़ते हैं तो इस साहसिक खेल को प्रशासनिक मान्यता से यहां युवाओं के लिए स्वरोजगार के मार्ग प्रशस्त हो सकते हैं। इसके अलावा यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।


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घने चीड़ और देवदार जंगलों से घिरा हुआ एक छोटा सुरम्य तश्तरी-आकार का ये पठार डलहौज़ी से लगभग 24 किलोमीटर दूर है और समुद्र तल से 6,500 फीट की ऊंचाई पर है।
घने चीड़, देवदार और हरे घास के मैदान की पृष्ठभूमि के सामने खजियार पश्चिमी हिमालय के भव्य धौलाधार पर्वत की तलहटी में सुंदर रूप से बसा है। तश्तरी के आकार का खजियार आगंतुकों को एक विशाल और लुभावनी परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।


खजियार को आधिकारिक तौर पर 7 जुलाई, 1992 को स्विस राजदूत ने नाम दिया था और रिकॉर्ड के अनुसार, यहां से एक पत्थर लिया गया था और स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में बनी पत्थर की मूर्तिकला का हिस्सा बनाया गया था। खजियार लोकप्रिय खज्जी नाग मंदिर के लिए प्रसिद्ध है जिसे सर्प देव को समर्पित किया गया है, जहां से माना जाता है कि यह नाम व्युत्पन्न हुआ है। यह मंदिर 10 वीं शताब्दी पूर्व का है, छत और लकड़ी के खूटी पर अलग-अलग शैलियों की छवियां बनी है। हिंदू और मुगल शैलियों का एक विलक्षण मिश्रण लकड़ी के नक्काशी में छत और लकड़ी के खूटी पर नजर आता है। इसके अलावा शिव और हडिम्बा देवी के अन्य मंदिर भी हैं।

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