नूरपुर बस हादसे का एक साल-लोग बोले, गांव में मत आना वोट मांगने, करेंगे बहिष्कार

हादसे में जान गवाने वालों को किया याद, दी श्रद्धांजलि

नूरपुर बस हादसे का एक साल-लोग बोले, गांव में मत आना वोट मांगने, करेंगे बहिष्कार

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रविंद्र चौधरी / जसूर। कहते हैं कि वक्त के साथ बड़े-बड़े जख्म भर जाते हैं। लेकिन, नूरपुर स्कूल बस हादसे में अपने जिगर के टुकड़ों को खोने वाले मां बाप के जख्म अभी भी नासूर बने हुए हैं। आज भी अपने लाडलों को याद कर उनकी आंखें भर आती हैं। क्या इनके जख्म कभी भर पाएंगे या फिर कोई जख्मों पर मरहम लगाएगा। यह सवाल अभी भी सवाल है। आप सोच रहे होंगे आज हम नूरपुर स्कूल बस हादसे को क्यों याद कर रहे हैं। तो आपको बता दें कि मंगलवार को नूरपुर के पास मलकवाल-ठेहर लिंक रोड पर चेली (खुवाड़ा) गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे को एक साल हो गया। आज भी अभिभावकों को एक तरफ अपने नन्हे मुन्ने बच्चों को खोने का दुख है तो वहीं अपने बच्चों को इंसाफ न मिलने का रोष है।

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मंगलवार को स्कूल बस हादसे में अपने प्राणों को गवाने वाले मासूमों और अन्य लोगों को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। नूरपुर बस हादसे में मारे गए मासूमों को इंसाफ न मिलने पर गांववासी भी तल्ख हैं। हादसे के एक साल पूरा होने पर गांव के लोगों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। कहा है कि किसी भी राजनीतिक दल को वोट नहीं डाला जाएगा। दो टूक कहा है कि अगर कोई राजनीतिक दल इन बच्चों को इंसाफ नहीं दिला सकता है तो कोई भी राजनीतिक दल इस गांव में वोट मांगने मत आना। आपको कोई भी हक़ नहीं है वोट मांगने का।

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गांव के विक्रम सिंह, कर्ण सिंह, हंस राज, सीमा देवी व सिमरन ने बताया कि आज ही के दिन गांव के 24 बच्चे, एक ड्राइवर, दो अध्यापक और एक अन्य दर्दनाक हादसे का शिकार हुए थे। बड़े ही अफसोस कि बात है कि शासन हो या प्रशासन या पक्ष हो या विपक्ष किसी ने भी खुलकर साथ नहीं दिया, जिससे हमारे बच्चों को इंसाफ मिल सके। गांव के लोग सीएम, हर मंत्री से और डीसी से मिले। यहां तक की डीसी के दफ्तर जाकर नाक तक रगड़ा की मामले की सीबीआई जांच करवाई जाए, जिससे हमें इंसाफ मिल सके।
हमारे बच्चों की आत्मा को शांति मिल सके। इन्होंने आज तक कोई भी ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे हमें लगे कि हमारे बच्चों को इंसाफ मिल रहा है। इस हादसे में पीडब्ल्यूडी को क्यों बचाया जा रहा है। एक वर्ष हो गया इस हादसे को सरकार इनसे डैमेज रिपोर्ट नहीं मांग पाई है। क्योंकि इसमें सरकारी अधिकारी फंस रहे हैं। उनको बचाने की कोशिश की जा रही है।बस पहले से ही पुरानी थी। क्या ऐसे ओर दर्दनाक हादसों का सरकार ईनतजार कर रही है।


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