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पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक को विश्व हेरिटेज में शामिल करने की कवायद

पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक को विश्व हेरिटेज में शामिल करने की कवायद

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धर्मशाला। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक (Pathankot-Joginder Nagar Railway Track) को विश्व हेरिटेज का दर्जा मिल सकता है। हिमालय के धौलाधार रेंज से होकर गुजरने वाली 164 किलोमीटर लंबी रेल लाइन यूनेस्को (UNESCO) की विश्व हेरिटेज की अस्थायी सूची में है और इस पर जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। वर्तमान में तीन नैरोगेज रेलवे लाइन कालका-शिमला, सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग और नीलगिरि माउंटेन रेलवे को यूनेस्को द्वारा विश्व हेरिटेज का दर्जा दिया गया है।

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एके पुठिया ने कहा कि कांगड़ा घाटी रेलवे (Kangra Valley Railway) को विश्व हेरिटेज का दर्जा देने के लिए यूनेस्को को एक आवेदन भेजा गया है। यूनेस्को के निरीक्षण के बाद निर्णय लिया जाएगा। गिनीज बुक ऑफ रेल फैक्ट्स एंड फीट्स ने कालका-शिमला रेलवे को भारत में सबसे बड़ी नैरोगेज इंजीनियरिंग के रूप में वर्णित किया है।

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भारतीय पर्वतीय रेलवे के विरासत मूल्य की मान्यता में यूनेस्को ने एक विशेष हेरिटेज सूची बनाई है, जिसमें दार्जिलिंग हिल रेलवे और नीलगिरि माउंटेन रेलवे शामिल हैं। कालका-शिमला रेलवे को सूची में शामिल किया गया था। एके पुठिया ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही कांगड़ा वैली रेलवे को विश्व विरासत (World Heritage) का दर्जा मिल जाएगा। यूनेस्को की एक टीम नैरोगेज रेलवे लाइन का निरीक्षण करेगी और उसके अनुसार आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अगर मंजूरी मिल जाती है तो यह उत्तर रेलवे के तहत आने वाला दूसरी विश्व धरोहर होगी।

 

1927 में अस्तित्व में आया था जोगिंद्रनगर रेल सेक्शन

रेलवे रिकॉर्ड के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में बनाए जाने वाले हाइड्रोलिक पावर के निर्माण कार्य में सामग्री पहुंचाने के लिए पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज ट्रैक का निर्माण कार्य 1927 में शुरू किया गया था। दो वर्ष में ही अप्रैल 1929 में बिना मशीनों का प्रयोग किए मैनपावर (Man Power) से 164 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक का निर्माण पूरा कर लिया गया। जब तक डैम का काम चलता रहा तब तक इस ट्रैक पर मालगाड़ी ही चलाई जाती रही, लेकिन डैम बनने के बाद ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेन को बैजनाथ तक स्टीम इंजन से चलाया गया। वर्ष 1972 में फिरोजपुर मंडल की ओर से स्टीम इंजन बंद कर इस मार्ग पर डीजल इंजन की मदद से ट्रेनें शुरू की गईं।

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