री एडमिशन और एनुअल चार्जेज को लेकर बयानबाजी पर भड़के निजी स्कूल संचालक

शिक्षा विभाग पर लगाया भम्र पैदा करने का आरोप 

री एडमिशन और एनुअल चार्जेज को लेकर बयानबाजी पर भड़के निजी स्कूल संचालक

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कांगड़ा। निजी स्कूल संचालकों (Private School Operators) ने  री एडमिशन और एनुअल चार्जिज (Re Admission and Annual Charges) को लेकर हो रही बयानबाजी पर कड़ा रुख इख्तियार किया है। निजी स्कूल संचालकों ने बैठक (Meeting) कर इस बावत रणनीति बनाई और शिक्षा विभाग (Education Department) के खिलाफ मोर्चा खोला। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की तरफ से हो रही ब्यानबाजी से अभिभावकों में भम्र पैदा हो रहा है। विभाग री एडमिशन व एनुअल चार्जिज को परिभाषित कर दे।
बैठक के बाद निजी स्कूलों के पदाधिकारियों डॉ. गुलशन कुमार, जसवंत कुमार, सुधांशु शर्मा, कृष्णा अवस्थी, सुखविंद्र, संजय शर्मा, अंकुश सूद, वासु सोनी, किशोर महाजन, विकी शर्मा, हरवंश कौंडल, राकेश कुमार, अनुराग गुप्ता व विजय कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि निजी स्कूलों को सरकार कोई अनुदान नहीं देती है। हिमाचल (Himachal) में ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे निजी स्कूलों में वैसे ही फीस बहुत कम है। एनुअल फीस (Annual Fees) के बिना हम स्कूल के खर्चे नहीं चला सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की तरफ से जो भी निर्देश दिए जाते हैं, उन्हें निजी स्कूल पूरा कर रहे हैं। आधारभूत ढांचे से लेकर वार्षिक रिजल्ट तक निजी स्कूलों के बढ़िया हैं। उन्होंने कहा कि नया सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में सरकार को इस भ्रम की स्थिति को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल शिक्षा विभाग को कक्षा बार फीस का विवरण मुहैया कराया जाता है। सरकार को उन स्कूलों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो भारी भरकम फीस वसूल रहे हैं। ना की सबको एक ही तराजू में तोला जाए।

यह दिए तर्क

  • सरकार जहां अपने इस सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चा सालाना 60 से 70 हजार रुपए खर्च कर रही, वहीं निजी स्कूलों में ये खर्च वार्षिक शुल्क सहित 15 से 20 हजार के बीच आता है। निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों को अपने स्तर पर निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।
  • हर साल बोर्ड से लेकर प्रारंभिक शिक्षा विभाग, भवन सुरक्षा पमाण पत्र, फायर सेफ्टी पर हजारों रुपए खर्च किए जाते हैं। 9वीं, 8वीं कक्षा के लिए पहले 20 रुपए प्रश्न पत्र शुल्क वसूल किया जाता था, जो इस वर्ष से प्रति बच्चा 100 रुपए कर दिया, जबकि उत्तर पुस्तिका का खर्च अलग से, ऐसे में री-एडमिशन फीस पर बवाल समझ से परे है।
  • निजी स्कूलों द्वारा संचालित ट्रांसपोर्टेशन की भी अच्छी व्यवस्था कम किराए पर की जा रही है। जितने भी नेता है, उनके बच्चे बडे़-बडे़ प्राइवेट स्कूलो में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, तो वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ा रहे हैं।
  •  हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिस तरह से ट्रांसपोर्ट पॉलिसी को प्राइवेट स्कूलों की बात की जा रही है, दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इससे अलग किया जा रहा है। प्राइवेट स्कूल की बसों में तो सिर्फ प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे की सफर करते हैं, उनके लिए सरकार ने बसों में जीपीएस स्पीड गवर्नर, कैमरा, कंडक्टर और हर प्रकार की सुविधा करवाने को कहा जाता है, जबकि जो बच्चे सरकार की बसों में या अन्य प्राइवेट बसों में सफर करते हैं, सुरक्षा को लेकर सरकार की मंशा के ऊपर भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

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