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#Kullu_Dussehra: देवभूमि में अनर्थ को रोकने के लिए 3 देवी-देवताओं ने किया छिद्रा

दशहरा उत्सव से नाराज देवी-देवताओं को शांत करने के लिए देव समाज ने किया पाश्चाताप

#Kullu_Dussehra: देवभूमि में अनर्थ को रोकने के लिए 3 देवी-देवताओं ने किया छिद्रा

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कुल्लू। विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा (Kullu Dussehra)उत्सव में ना बुलाने पर देवी-देवता सरकार, प्रशासन व दशहरा उत्सव समिति से नाराज हैं। देवभूमि में अनर्थ ना हो इसके लिए उत्सव के समापन होने के बाद तीन देवताओं (Three Deities) के कारकूनों ने भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में छिद्रा (पाश्चाताप) किया। कारकूनों ने देव कार्रवाई के माध्यम से यह छिद्रा किया। भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में पहुंचे देवता धूंबल नाग हलाण-दो, देवता श्री नारायण मेहा, देवता वीरनाथ फोजल के कारकूनों ने इस देव कार्रवाई को अंजाम दिया।

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तीनों देवता उत्सव के बाद वापिस अपने देवालय तब तक ना जाने पर अड़े थे जब तक देव कार्रवाई से छिद्रा ना किया जाए। रविवार को सुबह देवता भगवान पहले सुलतानपुर स्थित भगवान रघुनाथ के मंदिर पहुंचे और यहां से भगवान रघुनाथ (Lord Raghunath) के मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह को लेकर ढालुपर पहुंचे और यहां रघुनाथ के अस्थाई शिविर में देव कार्रवाई करने के आदेश दिए। जहां नाग धूंबल, देवता वीरनाथ फोजल और हरी नारायण मेहा के देव कारकूनों व मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंहए कारदार दानवेंद सिंह व रघुनाथ के पुजारी ने डोरी पकड़कर छिद्रा किया।

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रूष्ट देवी देवताओं को शांत करने के लिए किया गया छिद्रा

मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह (Maheshwar Singh) ने बताया कि दशहरा उत्सव पिछले कल लंका दहन के साथ संपन हो गया था, लेकिन उसके बाद देवता धूंबल नाग, देवता वीरनाथ, श्री नारायण अपने देवालय नहीं लौटे और सुबह भगवान रघुनाथ के मंदिर सुल्तानपुर पहुंचे। वहां पर देवपुछ में देवता ने अनर्थ से देव समाज को बचाने के लिए आखाड़ा बाजार से होकर व्यास नदी जट से होते हुए लंका बेकर में देवविधि कार्रवाई की, जिसके बाद ढालपुर भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में छिद्रा किया। उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव में रूष्ट देवी देवताओं को शांत करने के लिए और देव समाज को अनर्थ से बचाने के लिए छिद्रा किया जाता है। उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ व देवी देवताओं के साथ देवमिलन नहीं हुआ, जिससे किसी से भी कोई गलती हो जाए उसके पश्चाताप के लिए छिद्रा किया जाता है।

 

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छिद्रा करने से मिलती है गलती माफी

कहा जाता है कि जब छिद्रा कार्य करते हैं उसके बाद गलती माफी होती है। लिहाजा, दशहरा उत्सव में देव महामिलन ना होने के कारण देव समाज के लोगों ने छिद्रा किया है, ताकि देवी देवताओं के नाराज होने से किसी तरह का अनिष्ठ ना हो। देव समाज के लोगों ने बताया कि इस दौरान देवता और कारकूनों ने प्रशासन और पुलिस द्वारा लगाई गई धारा 144 का भी छिद्रा किया, जिस कारण लोग ढालपुर में आए हुए देवी देवताओं के दर्शन नहीं कर पाए। इसके साथ ही जिला के सैंकड़ों देवी देवता के दशहरा उत्सव में आने पर रोक लगाने को लेकर भी छिद्रा किया गया। देवताओं पर रोक लगाने से उत्सव के दौरान देव महामिलन नहीं हो पाया है। लिहाजा, गलती प्रशासन, पुलिस या देव समाज की हो इसके लिए छिद्रा यानि (पाश्चाताप) किया गया, ताकि कोई अनहोनी ना हो। उन्होंने कहाकि देवी देवताओं से जनमानस की रक्षा का आश्वासन दिया है और भगवान रघुनाथ के मंदिर में अन्नकूट उत्सव के दिन जगती का आयोजन होगा। उनके बाद देव आज्ञा के अनुसार धार्मिक कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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