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हाथों की लकीरें बताती हैं आपका स्वास्थ्य, जानें कैसे

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हाथों की लकीरें आपके स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ कहती हैं। किसी भी जातक के हाथ में स्वास्थ्य रेखा सामान्यतः मणिबंध से निकल कर बुध के क्षेत्र की ओर जाती है इसलिए इसे बुध रेखा भी कहते हैं। स्वास्थ्य रेखा जितनी अधिक स्पष्ट, दोषरहित और गहरी होगी, तत्संबंधी व्यक्ति का स्वास्थ्य अतना ही उत्तम होगा। चेहरे पर तेज, सुगठित कद और वह अपनी उम्र से सदैव कम दिखने वाला होगा। उत्तम स्वास्थ्य के साथ सूर्य रेखा अच्छी हो, तो जातक आजीवन सुखी और स्वास्थ्य रहेगा। स्वास्थ्य तथा भाग्य रेखा के मिलने से यदि मस्तक रेखा के नीचे त्रिकोण बना हो तो मनुष्य यषस्वी, दूरदर्षी और शास्त्रज्ञ तथा मीमंसक होगा। स्वास्थ्य, भाग्य और मस्तिष्क रेखाएं मिल कर त्रिभुज बनाती हों, तो मनुष्य तांत्रिक हेागा। गुप्त विज्ञान में उसकी विशेष रूचि होगी। 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार स्वास्थ्य रेखा यदि चक्कर खा कर चंद्र पर्वत पर चली गई हो, तो जातक सदैव रोगग्रस्त ही रहेगा। यदि स्वास्थ्य रेखा चंद्र पर्वत से होते हुए, हथेली के किनारे-किनारे चल कर, बुध तक पहुंचती है, तो जातक कई बार विदेष की यात्राएं करता है। चंद्र रेखा और स्वास्थ्य रेखा मिल जाएं, तो जातक काव्य प्रणेता होता है। जो स्वास्थ्य रेखा न तो जीवन रेखा को पार करे और न ही उसे काटे, वही अच्छी मानी जाती है। वास्तव में इस रेखा की सबसे शुभ स्थिति वह होती है, जब यह बुध क्षेत्र के नीचे ही नीचे सीधी चली आए। जब यह रेखा से मिल जाए, या इसमें से रेखाएं निकल कर जीवन रेखा में मिलें, तो यह इस बात का संकेत है कि जातक के शरीर में किसी रोग ने घर कर के उसके स्वास्थ्य को दुर्बल कर दिया है।

  • जब जीवन रेखा छोटे-छोटे टुकड़ों से बनी हो या जंजीरनुमा हो और स्वास्थ्य रेखा गहरी तथा भारी हो, तो जीवन भर भारी नजाकत और बीमारी बनी रहने की आषंका होती है। यदि स्वास्थ्य रेखा में मस्तिष्क रेखा के निकट, परंतु उसके ऊपर कोई द्वीप हो, तो नाक और गले के रोग होते हैं। यदि इस रेखा का मध्य भाग लाल है, तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य आजीवन खराब रहेगा। यदि स्वास्थ्य रेखा का प्रारंभ लाल है, तो उस व्यक्ति को हृदय रोग होगा। इस रेखा का अंतिम सिरा यदि लाल रंग का है, तो उसे सिर दर्द का रोग होगा।
  • समस्त रोगों का मूल पेट है। जब तक पेट नियंत्रण में रहता है, स्वास्थ्य ठीक रहता है। ज्योतिषीय दृष्टि से हस्तरेखाओं के माध्यम से भी पेटजनित रोग और पेट की शिकायतों के बारे में जाना जा सकता है। हथेली पर हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा और नाखूनों के अध्ययन के साथ ही मंगल और राहू किस स्थिति में हैं, यह देखना बहुत जरूरी है।
  • जिन व्यक्तियों का मंगल अच्छा नहीं होता है, उनमें क्रोध और आवेश की अधिकता रहती है। ऐसे व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी उबल पड़ते हैं। अन्य व्यक्तियों द्वारा समझाने का प्रयास भी ऐसे व्यक्तियों के क्रोध के आगे बेकार हो जाता है। क्रोध और आवेश के कारण ऐसे लोगों का खून एकदम गर्म हो जाता है। रक्तचाप के अनुसार क्रोध का प्रभाव भी घटता-बढ़ता रहता है। राहू के कारण जातक अपने आर्थिक वादे पूर्ण नहीं कर पाता है। इस कारण भी वह तनाव और मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता है।
  • हस्तरेखा विज्ञान पूर्ण रूप से मष्तिस्क के क्रिया-कलापों पर आधारित है ऐसा कहना असंगत नही होगा क्योंकि मस्तिष्क का मनुष्य के स्वास्थ्य से गहरा सम्बन्ध है अतः हस्त -रेखाएं, चिन्ह आदि भी हमारे मनोभावों के अतिरिक्त शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित हैं।
  • हथेली के विशेष क्षेत्र जिसे हस्तरेखा विज्ञान ‘पर्वत’ की संज्ञा देता है वास्तव में वे चुम्बकीय केंद्र हैं इन केन्द्रों का मष्तिस्क के उन केन्द्रों से सम्बन्ध है जो मानव के मनोभावों पर नियंत्रण करते हैं | हथेली के यह पर्वत मष्तिस्क में उत्पन्न होने वाली विद्युत् तरंगों को आकर्षित करते हैं। हस्तरेखाएँ इन तरंगों को पर्वत तक पहुँचाने का कार्य करती हैं।
  • चिकित्सा विज्ञान के अनुसार हथेली की रेखाओं पर कुछ ऐसे तंतु होते हैं जो हाथ में होने वाले कंपनों का संचालन करते हैं। व्यक्ति के शरीर की आन्तरिक संरचना एक जैसी होते हुए भी उसकी प्रवृत्ति,आदि में एक-दुसरे से असमानता होती है इसीलिए हाँथ की रेखाओं की बनावट भी भिन्न होती है, यहाँ तक की उंगलियों के निशान जो कि अपराधियों को पहचानने में बहुत सहायक सिद्ध होते हैं ] में भी असमानता होती है।

  • हथेली की रेखाएं हाथ को मोड़ने अथवा अन्य किसी बाह्य क्रिया से न तो निर्मित होती हैं और न ही टूटती हैं क्योंकि इनका सम्बन्ध मस्तिष्क प्रेषित प्राण ऊर्जा से है। योग के अंतर्गत – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार एवं ध्यान के द्वारा इन रेखाओं, पर्वतों के आकार-प्रकार में परिवर्तन लाया जा सकता है एवं परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है।
  • हस्त रेखा शास्त्री हाथ की रेखाओं को देख कर व्यक्ति के वर्तमान,भविष्य एवं उसके स्वास्थ्य की सही-सही गणना कर देता है। यदि हम रोग या परिस्थिति प्रतिकूलता विशेष के विपरीत सकारात्मक सोच विकसित कर लें तो मस्तिष्क की क्रियाओं से शरीर में ऐसी प्रतिक्रिया होने लगती है कि आश्चर्यजनक परिणाम सामने आने लगते हैं। फलस्वरूप हस्त चिन्हों में भी परिवर्तन होने लगता है।
  • यदि हथेली पर हृदय रेखा टूट रही हो या फिर चेननुमा हो, नाखूनों पर खड़ी रेखाएं बन गई हों तो ऐसे व्यक्ति को हृदय संबंधी शिकायतें, रक्त शोधन में अथवा रक्त संचार में व्यवधान पैदा होता है। यदि जातक का चंद्र कमजोर हो तो उसे शीतकारी पदार्थ जैसे दही, मट्ठा, छाछ, मिठाई और शीतल पेयों से दूर रहना चाहिए।
  • मंगल अच्छा न हो तो मिर्च-मसाले वाली खुराक नहीं लेनी चाहिए। तली हुई चीजें जैसे सेंव, चिवड़ा, पापड़, भजिए, परांठे इत्यादि से भी परहेज रखना चाहिए। ऐसे जातक को चाहिए कि वह सुबह-शाम दूध पीएं, देर रात्रि तक जागरण न करें और सुबह-शाम के भोजन का समय निर्धारित कर ले। सुबह-शाम केले का सेवन भी लाभप्रद होता है।
  • पेट की खराबी से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और फिर इसी वजह से रक्त विकार पैदा होते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप तक अख्तियार कर सकते हैं। यह मत विश्व प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री डॉ. आउंट लुईस का है। जिस व्यक्ति के हाथ का आकार व्यावहारिक हो और साथ ही व्यावहारिक चिह्नों वाला हो तो ऐसा जातक अपने जीवन में काफी नियमित रहता है।
  • हस्तरेखा देखकर कैंसर की पूर्व चेतावनी दी जा सकती है और इस जानलेवा बीमारी के संकेत चिन्ह हथेली पर देखे जा सकते हैं। मस्तिष्क रेखा पर द्वीप समूह या पूरी मस्तिष्क रेखा पर बारीक-बारीक लाइनें हो तो ऐसे जातक को कैंसर की पूरी आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में यदि मेडिकल टेस्ट करा लिया जाए और उसमें कोई लक्षण न मिलें, तब भी जातक की जीवनशैली में आवश्यक फेरबदल कर उसे भविष्य में कैंसर के आक्रमण से बचाया जा सकता है।

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