बेमौसमी सब्जियां उगा कर छोटा भंगाल के लोगों ने बदल डाली अपनी तकदीर

जो कमाते थे कभी हजारों आज कमा रहे लाखों

बेमौसमी सब्जियां उगा कर छोटा भंगाल के लोगों ने बदल डाली अपनी तकदीर

- Advertisement -

कांगड़ा जिला में दुर्गम क्षेत्र का जिक्र आते ही बैजनाथ उपमंडल के छोटा और बड़ा भंगाल क्षेत्र की तस्वीर जहन में आने लगती है। जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर छोटा भंगाल क्षेत्र, जहां लगभग वर्ष में 3 माह बर्फ की सफेद चादर रहती है।देवदार के उंचे और घने पेड़ों के बीच ऊहल नदी के दोनों तरफ सात पंचायतों में कोठी कोहड़, बड़ाग्रां, घरमान, मुल्थान, स्वाई, पौलिक और लुआई के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी ही रहा है। आलू, गेहूं, राजमाह और मक्का इत्यादि की खेती यहां पर होती है।


यह भी पढ़ें: बरसात में मुसीबत लगता है कपड़े सुखाना तो अपनाएं ये खास टिप्स

इस सबसे अलग हटकर यहां के किसानों ने बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर आर्थिकी को सुदृढ़ किया है। प्रदेश के कृषि विभाग ने यहां के किसानों को परम्परागत फसलों से नकदी फसलों और बेमौसमी सब्जी उत्पादन की ओर प्रेरित किया। परम्परागत खेतीबाड़ी से 4 से 5 हजार रुपये प्रति कनाल कमाने वाले यहां के किसान बेमौसमी सब्जी का उत्पादन कर 25 हजार रुपये प्रति कनाल तक कमा रहे हैं। यहां लगभग 700 हेक्टेयर क्षेत्र में बंद गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली, मूली और धनिया का उत्पादन हो रहा है।

छोटे से क्षेत्र में लगभग 7000 टन बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन हो रहा है, जिससे किसानों को लगभग 11 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हो रही है। किसानों को अपने उत्पादनों को बेचने के लिए भटकना ना पड़े इसके लिये सरकार ने मुल्थान में ही सब्जी मण्डी स्थापित की है। इसके अतिरिक्त किसान अपने उत्पाद सीधे प्रदेश के अन्य भागों के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, चण्डीगढ़ और दिल्ली आदि क्षेत्रों में अच्छे भाव पर बेच रहे हैं।

यहां के प्रगतिशील किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक कृषि का भी प्रशिक्षण दिया गया है। कोठी-कोहड़ के रूप लाल़ और बड़ाग्रां के जसवंत सिंह तथा रूप लाल यहां के लोगों को प्राकृतिक खेती के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी कुलदीप धीमान ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा यहां नाबार्ड की सहायता से 2 करोड़ से एकीकृत जलागम परियोजना के तहत ग्राम पंचायत कोठी कोहड़, बड़ागा्रं, घरमान, मुल्थान और लुआई इत्यादि में स्प्रींकलर सिंचाई सुविधा आरंभ की गई है। जिससे यहां के किसानों को सिंचाई आदि की सुविधा उपलब्ध होने से सब्जी उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। इसके अलावा किसानों को उन्नत शंकर किस्म के बीज़ अनुदान पर उपलब्ध करवाने के साथ-साथ नकदी फसलों को अधीनस्थ क्षेत्र को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

विषयवाद विशेषज्ञ बैजनाथ सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग समय-समय पर किसानों के लिए प्रशिक्षण एवं कृषि भ्रमण कार्यक्रमों का आयोजन करता है। यहां के किसानों को बंद एवं फूल गोभी की पनीरी उगाने के लिए 80 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। इसके अलावा आतमा परियोजना के तहत महिलाओं को भी सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है और महिलाओं के कृषक समूह बनाकर यहां की महिलाओं को भी आत्म निर्भर बनाया जा रहा है।

हिमाचल अभी अभी Mobile App का नया वर्जन अपडेट करने के लिए इस link पर Click करें …. 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

दो वर्ष की बेटी के साथ सुंदरनगर में पति को तलाश रही बिहार की महिला

ऑड-ईवन पर केजरीवाल का ऐलान - दोपहिया वाहनों को छूट, रविवार को लागू नहीं होगा नियम

चंडीगढ़ व दिल्ली की मंडियों में जाते हैं ऊना के इस किसान के फूल

राजगढ़ में कांग्रेस का लोकतंत्र बचाओ मार्च, जोरदार नारेबाजी के बीच माहौल बनाने पर जोर

सीएम जयराम के गृह जिला के इस स्कूल में 4 माह से खाली है अध्यापकों के पद

फिलीपींस में 6.4 तीव्रता का भूकंप, पांच की मौत, कई घायल

लगघाटी में पहाड़ी से गिरा पत्थरः सड़क से नीचे गिरा सवार, बाइक के उड़े परखच्चे

खुदाई करने वाली मशीन से टकराई बस, 35 तीर्थयात्रियों की मौत

बिना बिल और टैक्स भुगतान किए ले जा रहा था 20 लाख के आभूषण, कारोबारी पर एक लाख जुर्माना

पांच बीवियों का खर्च नहीं उठा पाया तो बन गया ठग, एम्स में नौकरी के बहाने लड़कियों से ऐंठता था पैसे

कांगड़ा और ऊना में कार्यरत पंजाब के इन कर्मचारियों को अवकाश घोषित

काम में कौताही पर पंचायत प्रधान और वार्ड सदस्य बर्खास्त

संतोषगढ़ के चौकी प्रभारी लाइन हाजिर, एसपी के आदेशों को हल्के में ले रहे थे

सेल्फी ले रही दो सहेलियां पार्वती नदी में बही, एक बच निकली दूसरी का अता-पता नहीं

शांता क्यों बोले ,जीवन के अंतिम पड़ाव पर मुझे किसी से भी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

Himachal Abhi Abhi E-Paper




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है