ब्रश करने के लिए इस्तेमाल करते हैं सिंक तो सावधान, हो सकता है बीमारियों का खतरा

सिंक वाटर बैक्टिीरिया कम करते हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता

ब्रश करने के लिए इस्तेमाल करते हैं सिंक तो सावधान, हो सकता है बीमारियों का खतरा

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नई दिल्ली। हम सभी ब्रश (Brush) करने के लिए सिंक (Sink) का इस्तेमाल करते हैं। वॉशबेसिन और किचन सिंक में कई तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदाय‍क हो सकते हैं। सिंक वाटर बैक्टिीरिया आपके रोगों से लड़ने वाली प्रतिरक्षा स्तर को कमजोर करते हैं। अगर आप भी ब्रश करने के लिए सिंक का इस्तेमाल करते हैं तो ध्यान रहे कि सिंक के पानी से आपको कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है।


बता दें, रोज इस्तेमाल किया जाना वाला पानी आर्सेनिक, नाइट्रेट और फ्लोराइड से प्रदूषित हो जाता है। इससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप अच्छे और गंदे पानी की पहचान कर सकते हैं।

गंध या अजीब स्वाद से रहित हो पानी : दैनिक उपयोग के लिए पानी में प्रदूषित तत्वों की तलाश करने और उनसे बचने के कई विकल्‍प हैं। इसके अलावा, लोगों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वह जिस पानी और नल का उपयोग करते हैं, वह पानी और नल दोनों ही गंध या अजीब स्वाद से रहित होने चाहि। यदि नल का पानी ब्रश करते समय किसी धातु का स्वाद देता है तो यह असुरक्षित प्रदूषित तत्वों की मौजूदगी का संकेत है।

सिंक बैक्‍टीरिया से रहें सावधान और अपनाएं ये उपाय : घरों के ओवरहेड टैंक में पानी वायरस और बैक्टीरिया के लिए प्रजनन का मुख्य आधार है। इसलिए समय-समय पर उनकी सफाई करना जरूरी है और वाटर टैंक में पानी को साफ करने के लिए क्‍लोरिन का इस्तेमाल करें।

होती हैं ये बीमारियां : गंदे पानी की वजह से सर्दी, वायरल संक्रमण, इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, मलेरिया, डेंगू, डायरिया, गैस्ट्रोएंटेरोसाइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस या पीलिया जैसी आम बीमारियां हो सकती हैं। इन सभी बीमारियों का कारण ज्यादातर दूषित पानी ही होता है। इसलिए आप कोशिश करें कि वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सके।

सिंक के पानी से बचने के लिए करें ये उपाए:

सिंक के पानी की शुद्धि के लिए कुछ खास उपकरणों को स्थापित करने और जलजनित रोगों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। ऐसे उपकरणों को बाथरूम सिंक, रसोई सिंक और वॉशबेसिन में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि उनमें माइक्रोस्कोपिक कंटेमीनेंट्स फंस सकें और हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकाल सकें। सिंक या वॉशबेसिन के पानी का उपयोग जितना हो सके कम करें।

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