सहर उदास है

सहर उदास है

- Advertisement -

स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी जब आखिरी बच्चा भी चला गया तो पूर्वा ऑफिस की ओर मुड़ गई। ग्राउंड में सन्नाटा था। जगह-जगह रैपर और कागज बिखरे थे। पूर्वा ने मेज से किताबें उठाईं चश्मा पर्स में रखा और बाहर निकल आई। उसने आकाश की ओर देखा … बादल नम थे …जाने बादल ही धुंधले थे या कि आंखों में आया पानी उसकी दृष्टि धुंधली कर गया था। जो बात चार साल पहले गुजर गई थी वह अचानक इस तरह सामने आएगी, उसने सोचा ही नहीं था। सुबह अभिनंदन के किसी दोस्त का फोन आया था- आपके शहर किसी काम से आया था, सोचा मिलता जाऊं। क्या मिल सकेंगी आप…? वह आया, देर तक उसके पास बैठा रहा, जैसे कुछ कहने की हिम्मत जुटा रहा हो फिर उसने बैग से एक डायरी निकाल कर उसे थमा दी थी।
-काफी दिनों से अभि की यह डायरी मेरे पास रखी थी, इस पर आपका ही हक था भाभी।
पूर्वा उसे आवाक सी देखती रह गई थी। वह उदास था …अभिनंदन को वह भी बहुत प्यार करता था। देर तक व दोनों खामोश बैठे रहे अपने आप में गुम …टूटे हुए। पूर्वा ने डायरी ले ली, पर उसे खोल कर देखने की हिम्मत नहीं कर पाई।
संजय तो चला गया, पर अभिनंदन हजार-हजार रूपों में उसके सामने आ खड़ा हुआ।


imagesस्कूल से कमरे तक आते-आते खासी बारिश शुरू हो गई। उसने कमरा खोला और हाथ में पकड़ी किताबें मेज पर रख दीं। तौलिए से गीले बाल सुखाते हुए उसकी नजर फिर डायरी पर चली गई। डायरी हाथों में उठाए वह खिड़की के पास रखी ईजी चेयर पर बैठ गई।
बाहर अब मूसलाधार बारिश थी और उसके मन के अंदर गहन अंधेरा भर गया था। उसे लग रहा था कि समय तो अपनी गति से आगे बढ़ गया था पर वह वहीं खड़ी रह गई थी जहां अभिनंदन उसे छोड़कर गया था। अभिनंदन से उसकी मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी। वह नर्वस थी और अभि एकदम से उसके सामने आ गया था। चश्मे के पीछे से झांकती आंखें, हलकी बढ़ी हुई शेव और लापरवाह सा व्यक्तित्व।
-क्यों परेशान हो रही हैं, नौकरी तो वैसे भी नहीं मिलनी, पहले ही सिफारिश वालों के लिए तय हो चुकी होगी। हम-आप और यहां आए बहुत से लोग बस फालतू के मोहरे हैं। उसने हंस कर कहा था।
-आप यहां के तो नहीं लगते … पूर्वा ने उसे ध्यान से देखा था।
-हूं भी नहीं मैं दूसरे राज्य से आया हूं मेरे पास डिग्रियां तो अच्छी खासी हैं पर वहां नौकरी नहीं। अब देखता हूं यहां भी वही हाल है।
आशा के विपरीत उन दोनों को उस स्कूल में नौकरी मिल गई थी। साल भर अभिनंदन उसके साथ ही काम करता रहा, पर पूर्वा ने उसे कभी खुश नहीं देखा। हर समय जाने कितने-कितने सवालों से घिरा रहता था। धीरे-धीरे पूर्वा को वह लापरवाह जिद्दी व्यक्तित्व अपना सा लगने लगा।
पूर्वा के आंगन में एक तरफ हरसिंगार का पेड़ था। मौसम में उस पेड़ के नीचे की धरती सुंदर नन्हे फूलों से ढक जाती थी। तब सारा वातावरण उन क्रीम-नारंगी फूलों की महक से भर जाता था। वह अक्सर इसी पेड़ के नीचे बैठ कर किताबें पढ़ती थी। एक शाम अभिनंदन आया तो उसे वहां बैठे देख कर हंस उठा था।
-आज मैं जान पाया हूं पूर्वा कि तुम्हारे बालों में फूलों की सुगंध क्यों आती है। रहती तो तुम फूलों के बीच ही हो।
-इस पेड़ से… यहां रखी कुर्सियों से मां-पापा की यादें जुड़ी हैं। हम अक्सर यहां बैठते थे बाकी जिंदगी में, मैं किसी का यकीन नहीं कर पाई।
-मेरा यकीन कर सकती हो…? वह पलट कर उसके पास आ गया। सुनो पूर्वा जिंदगी में इतनी भाग दौड़ रही कि प्यार के बारे में कभी सोच ही नहीं पाया, पर अब ऐसा लगने लगा है कि यह एहसास बिना दस्तक दिए मेरे दिल में दाखिल हो गया है। सच तो यह है पूर्वा कि तुम्हें लेकर मैं खुद कहीं से कमजोर पड़ता जा रहा हूं।
जाने कैसी आत्मस्वीकृति थी अभिनंदन की कि पूर्वा की आंखें बंद हो गईं। आंखें बंद किए पूर्वा…चारों तरफ फैली हरसिंगार की खुशबू और उसे बाहों में लिए अभिनंदन।
उसके बाद के बहुत छोटे-छोटे…स्नेह के पल जिन्हें पूर्वा याद करती है और संभाल-संभाल कर पुराने खतों की तरह रखती जाती है।
बारिश तेज हो गई थी। उपरले पहाड़ों पर धुंध और वर्षा से सब कुछ ओझल होता जा रहा था, पर अभिनंदन की यादें सजीव हो उठी थीं। ऐसा कभी लगा ही नहीं कि अभिनंदन अब नहीं है। बस यही लगता है कि वह यहीं कहीं है और अभी सामने आ खड़ा होगा।
कविताएं करता था वह…दोस्तों के बीच एक के बाद एक कविता सुनाता जाता और यह सिलसिला खत्म होने में नहीं आता था।
-तुम कविताओं की लड़ियां कैसे पिरो लेते हो ? वह हैरान होती।
-तुम सामने रहो, तो कविताएं अपने आप उगने लगती हैं। देखना, तुमसे शादी के बाद मैं कविताओं की फसल उगाऊंगा।
धीरे-धीरे उसकी आंखों का उत्साह बुझने लगा था। लगता था उसकी जिजीविशा अंदर ही अंदर मरती जा रही थी। हार गया था वह संघर्ष करते-करते।
-सोचता हूं किसी दूसरे राज्य में कोशिश करके देखूं। दरअसल हम आज के परिवेश में मिसफिट हो गए हैं पूर्वा। नौकरी मिल जाए तो तुम्हें बुला लूंगा। बिना नौकरी के विवाह की बात असंगत सी लगती है।
पूर्वा समझ गई थी कि अभिनंदन को बांधा नहीं जा सकता था। जाने से एक दिन पहले वह उसे लेकर शहर से दूर चला गया था। वहां एक छोटी सी नदी बहती थी उसी के किनारे एक चट्टान पर दोनों देर तक बैठे रहे थे फिर वह उसकी गोद में सिर रखकर लेट गया था और आंखें बंद कर ली थीं। सूर्य पश्चिम की ओर गया, तो सारा आकाश एक लंबा चौड़ा कैनवास बन गया। गुलाबी, सलेटी, पीली पट्टियां। इधर-उधर छितरे बादलों के टुकड़े। पूर्वा चुपचाप रंग बदलते क्षितिज को देखती रही। शाम गहराते देख वह आंखें बंद किए अभि के चेहरे पर झुक गई।
sad-अभि घर वापस नहीं चलना…? नदी पार के घरों में देखो रोशनी झिलमिलाने लगी है।
अभि ने उनींदी आंखों से उसे देखा और हंसकर उसे बाहों में समेट लिया।
-सोचता हूं यादों में रखने के लिए कुछ पल जी लूं। सच तो यह है पूर्वा कि तुम्हारे बिना मैं एक पल भी नहीं जी सकता। तुम सचमुच पूर्वी हवा की तरह हो …शीतल ठंडी.. या फिर वेद ऋचा की तरह पवित्र सुखद और आनंदमयी। अचानक ही उसकी पकड़ ढीली हो गई थी और वह उदास हो गया था।
-पूर्वा ऐसा क्यों होता है कि जो हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है वही हमसे छूट जाता है।
पास में कहीं कोयल बोल उठी। पूर्वा चौंक गई।
– यह क्या… रात में कोयल बोल रही है।
– उसकी घड़ी गलत हो गई है …अभि होंठ टेढ़े कर मुस्कुरा दिया।
– तुम्हारी भी घड़ी गलत हो गई है …अब उठो। पूर्वा ने उसे जबरदस्ती उठा दिया।
पूर्वा की आंखों में वह नदी किसी तस्वीर की तरह फ्रीज हो गई है। उसका चेहरा हाथों में लिए अभि और कानों में उसकी प्यार भरी आवाज…पूर्वा देखना हमारी आने वाली सहर खुशनुमा होगी। उन शब्दों की पीड़ा कहीं आज भी उसे गहरे से छूती है।
अगली सुबह वह चला गया था। अभिनंदन फिर कभी नहीं लौटा …सिर्फ उसकी खबर आई थी। किसी इंटरव्यू के लिए जाते हुए उसका एक्सीडेंट हो गया था। बिना कुछ कहे-सुने उसने दोस्त की बाहों में दम तोड़ दिया था।
पूर्वा ने डायरी खोली एक बारगी उसकी आंखें आंसुओं से भर गईं। जाने कितने टेलीफोन नंबर उसमें दर्ज थे …कितनी ही फर्मों, स्कूलों के पते, कुछ कविताएं और आखिरी पेज पर जगह-जगह पूर्वा का नाम लिखा हुआ था। यह उसकी डायरी थी जो पूर्वा को फूलों के बीच ही रखना चाहता था…जो कविताओं की फसल उगाना चाहता था। यह उसके संघर्ष और अंत का दस्तावेज था। डायरी बंदकर पूर्वा ने आंखों से लगा ली मानो वह कोई पवित्र पुस्तक हो। हां, किस मायने में वह किसी पवित्र पुस्तक से कम हो सकती थी।
-रेणु श्रीनिवास

You can pass the order college essay amazon aws-certified-developer-associate exam by preparing with exam practice test.

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook. Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

कुल्लू में हमीरपुर नंबर की गाड़ी से 340 ग्राम चरस बरामद, 6 युवक धरे

चंबाः बनीखेत में महिला टीचर ने फंदा लगाकर दी जान, ऊना की थी रहने वाली

कांगड़ा के गगल में घर में लगी आग, लाखों का हुआ नुकसान

आईआईटी प्रशिक्षुओं से बोले राज्यपाल, नौकरी पर न रहें निर्भर, लगाएं उद्योग

First Hand: अध्यक्ष पद से हटने के बाद क्या करेंगे BJP प्रदेशाध्यक्ष सत्ती, स्वयं बता दिया वीडियो में

जामिया के छात्रों का उग्र प्रदर्शन : तीन बसों में लगाई आग, एक कर्मचारी घायल

नागरिकता क़ानून पर पीएम मोदी का बयान, कहा- कपड़े बताते हैं आग लगाने वाले कौन हैं

मनाली गोलीकांड से गुस्साए होमगार्ड जवानों ने किया सुंदरनगर में प्रदर्शन

ओटीआर के आश्वासन के बाद पोस्ट कोड 556 के रिजेक्ट अभ्यर्थियों का धरना समाप्त

सरकारी नौकरी : जल्दी करें हाईकोर्ट में स्टेनो टाइपिस्ट के पदों पर बंपर भर्ती

मौसम ने बदली करवटः राजधानी में हुआ सीजन का दूसरा हिमपात

पुलिस ने 1440 नशीले कैप्सूल के साथ धरा नशा तस्कर

लाखों की ऑनलाइन ठगी के मामले में कुल्लू पुलिस ने झारखंड से पकड़ा शातिर

जूते चुराने की रस्म पर भड़का दूल्हा, घर वालों को कहे अपशब्द, दुल्हन ने तोड़ी शादी

लड़कियों की स्टेट जूनियर हॉकी चैंपियनशिप 20 से,तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है