लाल परी की पायल

लाल परी की पायल

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चंदन नगर के राजा कुछ दिनों से बहुत परेशान थे। उनके मेवों की बगीची में सारे फल पक कर तैयार थे पर हर रात जाने कौन पके फलों की चोरी कर ले जाता था। राजा ने बार-बार पहरे बैठाए पर नतीजा शून्य ही रहा। हर पहरेदार सुबह मरा हुआ मिलता। अंत में हार कर राजा ने दरबार में कहा कि अगर कोई चोर को पकड़ कर ले आएगा तो उसे मैं आधा राज्य दे दूंगा। यह ऐलान सुनकर मंत्री का बेटा राजवीर उठ खड़ा हुआ और बोला कि मुझे राज्य का लालच नहीं पर मैं चोर को जरूर पकड़ कर ले आऊंगा। राजा ने आज्ञा दे दी।
उस सारी रात राजवीर सोया नहीं बल्कि मेवों की बगीची में छुप कर पहरा देता रहा। आधी रात गुजर जाने के बाद चांदी का एक उड़नखटोला आसमान से उड़ता हुआ आकर बगीची में उतरा। उसके चारों ओर चार हंस थे जो उसे उड़ा कर लाए थे। उस पर से कई परियां अपनी दासियों के साथ उतरीं और बगीची में टहलने लगीं ।


angel-redराजवीर हैरान सा देखता रहा…परियों ने अपने नाम के अनुसार कपड़े पहन रखे थे। नीलम परी ने नीले, सब्ज परी ने हरे और लाल परी ने लाल रंग के रेशमी कपड़े पहन रखे थे । उनकी दासियों ने सफेद कपड़े पहने हुए थे। सिर से पांव तक जेवरों से सजी उन परियों को देख कर राजवीर स्तब्ध रह गया । फिर उसे याद आया कि वह यहां क्या करने आया था। यही तो मौका था ।अचानक लालपरी टहलती हुई उस झाड़ी के पास आ गई जहां राजवीर छिपा हुआ था। उसने आंचल में काफी मेवा इकट्ठा कर रखा था। राजवीर ने अचानक तलवार चलाई और लाल परी की पायल कट कर गिर गई। वह चीखती हुई भागी उसका दुपट्टा वहीं पड़ा रह गया। पलक झपकते ही परियां उड़न खटोले पर बैठीं और वह आसमान में उड़ गया। राजवीर ने पायल उठा ली उसे दुपट्टे में लपेटा और घर जाकर गहरी नींद सो गया।
दूसरी सुबह दरबार लग गया पर राजवीर नहीं आया। कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया ,कैसे आएगा डर के मारे कहीं भग गया होगा।
राजा ने भी सिपाहियों को आदेश दिया जा कर बगीची में देखें ऐसा न हो उसे भी मार डाला गया हो ।
सिपाही वहां गए ,पर वहां कोई लाश नहीं थी। बारह बजने को थे जब राजवीर दरबार में आया।

payalउसने दुपट्टे मे लिपटी पायल राजा के सामने मेज पर रख दी। पायल पर सूर्य की किरणें पड़ते ही उसमें जड़े माणिक्यों की रोशनी से पूरा दरबार गुलाबी हो उठा।
-यह क्या है ? राजा ने कौतुक से पूछा।
-आपकी बगीची में परियां आती हैं वही मेवे खा जाती हैं। उन्हीं में से एक लाल परी की यह पायल है।
-मामला परियों का है उनको सजा नहीं दी जा सकती और वे मानवीय भी नहीं हैं ।अब हम क्या करें।
-कुछ खास नहीं महाराज परियों के लिए रोज रात पहले से ही एक थाल में मेवे रखवा दीजिए। और वहां एक तख्ती लगवा दीजिए कि वे जितना खाना चाहती हैं खा सकती हैं ,परंतु बाग का नुक्सान न करें।
राजा ने ऐसा ही किया। दूसरी रात एक बड़े चांदी के थाल में ढेर सारे मेवे रखवा दिए गए। सचमुच उस रात परियां और खाकर चली गईं । उन्होंने आगे भी कोई नुकसान नहीं किया।
राजा ने अपने कहे अनुसार राजवीर को आधा राज्य दे दिया और पायल अपनी राज कुमारी को दे दी।

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