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प्रदेश में लोहड़ी की धूम, लोगों ने अलाव जलाकर डाली तिल-गुड़ और मूंगफली की आहुतियां

प्रदेश में लोहड़ी की धूम, लोगों ने अलाव जलाकर डाली तिल-गुड़ और मूंगफली की आहुतियां

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शिमला। प्रदेश भर में सोमवार को लोहड़ी (Lohri) पर्व धूमधाम से मनाया गया। हालांकि बारिश ने इसमें कुछ हद तक खलल डाला लेकिन फिर भी लोगों के जोश केा कम नहीं कर पाई। राजधानी शिमला (Shima) में भी सोमवार को लोहड़ी पर्व बारिश के बीच धूमधाम से मनाया गया। शहर के बाजारों में जगह-जगह पर गुड़, तिल, गज्जक व रेवड़ी के स्टालों पर लोगों ने दिनभर खरीदारी की। कार्यालयों में भी सभी ने एक-दूसरे को लोहड़ी पर्व की बधाई दी। लोगों ने मिलकर जगह-जगह पर अलाव जलाई व तिल, गुड़, मुंगफली की आहुति डाली।

बता दें कि लोहड़ी पर्व पंजाब (Punjab) में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा ही माहौल शिमला के गुरूद्धारों में भी देखने को मिला। यहां सिख समुदाय (Sikh Community) के लोगों ने गुरूद्वारे के बाहर प्रसाद बांटा। आलम यह रहा कि शिमला में लोहड़ी पर्व पर शिमला के रिज सहित अन्य जगहों पर लोगों ने लोहड़ी जला कर लोहड़ी का प्रसिद्ध गीत सुंदर मुंदरी हो तेरा कौन बचारा हो….. गाना गाकर लोहड़ी का पर्व मनाया। शाम 5:36 बजे से 6:21 बजे तक लोहड़ी मनाने का शुभ मुहूर्त था। बावजूद इसके देर रात तक कार्यक्रम चलते रहे।


शिमला के नाज मंडी, गंज बाजार, छोटा शिमला व लक्कड़ बाजार, संजौली, ढली, कसुम्पटी, खलिनी, न्यूशिमला, बीसीएस में लोगों ने अलाव जलाई व आग के चारों ओर इकट्ठा होकर लोगों ने लोहड़ी मनाई। गंज बाजार में मक्की की रोटी और सरसों के साग का भंडारा लगाया गया। सनातन धर्म सभा की ओर से आयोजित इस भंडारे में मक्की की रोटी बनाने के लिए विशेष तौर पर पंजाब से कारीगर बुलाए गए थे। भंडारे में आए लोगों को छाछ भी परोसी गई।

वहीं शिमला के मंदिरों में भी सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा। मिडल बाजार स्थित शिव मंदिर, गंज बाजार राधा कृष्ण मंदिर और कालीबाड़ी मंदिर में भी लोग दर्शनों के लिए उमड़े, जबकि शहर में जगहों-जगहों पर लोग ढोल की थाप पर जमकर नाचते गाते नजर आए। लोहड़ी से अगले दिन लोग मकर संक्रांति मनाते हैं। इस दिन तीर्थ स्थलों में जाकर पवित्र स्नान किया जाता है।

किसानों से जुड़ा है लोहड़ी पर्व

प्रकृति को धन्यवाद कहने का पर्व लोहड़ी किसानों से जुड़ा हुआ पर्व है। किसान फसल के आगमन पर मौसम के सहयोग को धन्यवाद के रूप में इस पर्व को मनाते हैं। लोहड़ी पर्व को किसान आग जलाकर मुंगफली, तिल, गुड़ और गन्ने की आहुतियां डालकर भगवान का धन्यवाद करते हैं कि उनकी अच्छी फ सल के लिए उनका सहयोग किया और उनकी मेहनत रंग लाई। इसके अलावा लोहड़ी को मकर संक्रांति के आगमन की दस्तक भी कहा जाता है।

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