जब भीड़ में धक्के खाकर पड्डल मैदान पहुंचे थे पंडित नेहरू

खलियार से पड्डल मैदान तक पैदल चलकर गए थे

जब भीड़ में धक्के खाकर पड्डल मैदान पहुंचे थे पंडित नेहरू

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वी कुमार/मंडी। देश के पहली लोकसभा के लिए 1952 में चुनाव हुए थे और आज देश 17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए देश तैयार बैठा है। जब पहले लोकसभा चुनाव (Lok sabha election) हुए थे तो उस वक्त देश भर में कांग्रेस पार्टी का ही ज्यादा बोलबाला था। देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pandit jawahar lal nehru) ने देश भर का भ्रमण करके पार्टी प्रत्याशियों के लिए वोट (Vote) मांगे थे। उस दौरान पंडित नेहरू छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी शहर भी आए थे। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी रानी अमृत कौर के लिए उन्होंने प्रचार भी किया और वोट भी मांगे।


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91 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं कि 1952 में जब पंडित नेहरू मंडी (Mandi) आए तो खलियार के पास उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवा दी। क्योंकि यहां से आगे रास्ते के दोनों तरफ बड़ी संख्या में जनसमूह हाथों में फूल मालाएं लिए उनके स्वागत के लिए खड़ा था। विक्टोरिया पुल (Victoria bridge) से होकर नेहरू जनता का अभिवादन स्वीकारते हुए चौहाटा बाजार तक पहुंचे। यहां भीड़ कुछ ज्यादा हो गई और लोग नेहरू से मिलने के लिए टूट पड़े। पं नेहरू की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने लाठी चार्ज करने की सोची ही थी कि नेहरू ने उन्हें अपने पास बुलाकर ऐसी किसी भी कार्रवाई को करने से साफ इनकार कर दिया।

कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं कि नेहरू ने उस वक्त सुरक्षा कर्मियों से कहा था, ’’यह जनता है और अब इनका राज है, आप पीछे हट जाओ।’’ इसके बाद लोगों से घिरे नेहरू उसी भीड़ में धक्के खाते हुए ऐतिहासिक पड्डल मैदान (Paddal ground) पहुंचे थे। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला ने उनके पांव छूने की कोशिश भी की थी लेकिन नेहरू ने उनसे कहा, ’’माता हम सब आजाद हैं और सब एक हैं।’’ कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं कि आज दिन तक उन्होंने किसी प्रधानमंत्री की इतनी सादगी नहीं देखी। प्रधानमंत्री तो दूर ,आज के दौर में किसी मंत्री से भी इस प्रकार की सादगी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। पंडित नेहरू के साथ उनकी बेटी इंदिरा गांधी भी मौजूद थी और उस वक्त वह काफी कम उम्र की थी। कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं कि पड्डल मैदान में जनसभा को संबोधित करने से पहले नेहरू चाय पीने चले गए।

जनसभा में नहीं लगने दिए थे अपने नारे

इस दौरान मंच संचालन कर रहे किशन चंद ने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि जैसे ही पं नेहरू मंच पर आएं तो उनकी जिंदाबाद के नारे लगाए जाएं। यह बात चाय पीते वक्त नेहरू ने सुन ली और जब वह मंच पर आए तो किसी को भी नारे नहीं लगाने दिए। उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं और मेरी प्रशंसा की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि उस दौर में सिर्फ कांग्रेस पार्टी (Congress Party) का ही एकछत्र राज था लेकिन फिर भी नेहरू यहां से प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे। बताया जाता है कि मंडी और पटियाला के राज परिवारों के साथ नेहरू के काफी घनिष्ठ संबंध थे जिसके चलते वह यहां पर प्रचार के लिए आए।

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हालांकि पहले मंडी के राजा जोगिंद्र सेन को यहां से चुनाव लड़ने का न्योता दिया गया था लेकिन उन्होंने पटियाला राजघराने के साथ अपनी रिश्तेदारी के फर्ज को निभाते हुए उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया। रानी अमृत कौर न सिर्फ यहां से पहली सांसद और महिला सांसद चुनकर गई बल्कि देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री भी बनी, जोकि मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। इसके बाद देश ने कई आम चुनाव देखे और फिर मंडी में कई नेताओं का आना हुआ। इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी कई बार मंडी आकर चुनावी जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ बहुत कुछ बदला और के दौर में होने वाले चुनावों का स्वरूप सभी के सामने है।

 

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