बिग ब्रेकिंग : बीजेपी को भारी पड़ सकती है वीरभद्र और पंडित सुखराम के बीच ‘जीत की झप्पी’

कांग्रेस की जीत के लिए भुलाए आपसी गिले-शिकवे

बिग ब्रेकिंग : बीजेपी को भारी पड़ सकती है वीरभद्र और पंडित सुखराम के बीच ‘जीत की झप्पी’

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नई दिल्ली। हिमाचल की राजनीति में एक-दूसरे से 36 का आंकड़ा रखने वाले दो दिग्गज पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (Former CM Virbhadra Singh) और पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम (Pandit Sukhram) शुक्रवार को यहां पार्टी की जीत के लिए गले मिले। सुखराम ने हाल में कांग्रेस ज्वॉइन की है। दोनों नेताओं की इस ‘जीत की झप्पी’ के बड़े सियासी मायने हैं। दोनों नेताओं की एकजुटता लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में बीजेपी को भारी पड़ सकती है।


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राजनीति के दोनों धुरंधर लंबे समय बाद एक-दूसरे से मिले हैं। दोनों ने आपस में गले मिलकर अभिवादन किया। दोनों वरिष्ठ नेताओं की बॉडी लैंग्वेज (Body language) से यह साफ लगा रहा था कि उन्होंने आपसी गिले-शिकवों को कांग्रेस पार्टी की राज्य में जीत सुनिश्चित करने के लिए भुला दिया है। सुखराम ने अपने पोते आश्रय शर्मा के लिए मंडी सीट से कांग्रेस का टिकट मांगा है।

बढ़ सकती है बीजेपी की मुश्किलें

वीरभद्र सिंह और पंडित सुखराम (Pandit Sukhram) की इस मुलाकात से प्रदेश के सियासी माहौल में एक नई हलचल पैदा हो सकती है। बताया जा रहा है कि दोनों ने लोकसभा चुनावों को लेकर चर्चा की और यह निर्णय लिया कि चुनावों में पूरी एकजुटता के साथ काम करते हुए पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में काम किया जाएगा और जीत सुनिश्चित की जाएगी। इस मुलाकात से बीजेपी की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं, जबकि कांग्रेस (Congress) के उन कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा जो इन दोनों धुरंधरों के साथ जुड़े हुए हैं।


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ऐसे बढ़ा था विवाद

1996 में सुखराम के घर सीबीआई की रेड हुई थी सुखराम उस समय लंदन में थे। उन्‍होंने वीरभद्र पर घर में पैसे रखवाने का आरोप लगाया था। इस प्रकरण के बाद कांग्रेस ने सुखराम को पार्टी से बाहर कर दिया था। सुखराम ने 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस (हिविकां) का गठन किया। उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीत लीं। कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया व भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। इससे दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं।

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