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हनुमान होंगे प्रसन्न अगर करेंगे यह सब …

Hanuman Jayanti

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व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि ब्रह्मचर्य का पालन करें व जमीन पर ही सोयें तो अच्छा रहता है। प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठें, प्रभू श्री राम, माता सीता एवं हनुमान का स्मरण करें। फिर नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान करें। बजरंग बलि हनुमान की प्रतिमा की प्रतिष्ठा कर विधिपूर्वक पूजा करें और हनुमान की आरती उतारें, इसके बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी करें। इस दिन श्री रामचरित मानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जा सकता है। प्रसाद के रूप में गुड़, भीगे या भुने हुए चने एवं बेसन के लड्डू रख सकते हैं। पूजा सामग्री के लिये गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले फूल, सिंदूर, केसरयुक्त चंदन, धूप-अगरबती, शुद्ध घी या चमेली के तेल का दीप आदि ले सकते हैं। इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं तो मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

Hanuman Jayantiहनुमान जी कैसे होंगे प्रसन्न … जानिए

हनुमानजी को मीठा पान अत्यंत प्रिय है। हनुमान जयंती के दिन हनुमानजी को मीठा पान जरूर भेंट करें। पान में पांच प्रकार की वस्तुएं होना चाहिए। कत्था, गुलकंद, खोपरा, सौंफ और गुलाबकतरी। इनके अलावा चूना, सुपारी और अन्य कोई वस्तु बिलकुल नहीं हो। इस पान से हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनचाही वस्तु प्रदान कर देते हैं।

  • हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर के शिखर पर तिकोना लाल झंडा लगवाएं। इससे सर्वत्र विजय हासिल होती है। जीवन की समस्त परेशानियों का हल निकलता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। कोर्ट-कचहरी, मुकदमों में जीत मिलती है। हनुमान की छत्रछाया हमेशा आप पर बनी रहेगी।
  • सफेद आंकड़े के 21 पत्तों पर केसर-चंदन से राम-राम लिखकर उनकी माला बनाकर हनुमानजी को पहनाएं। इस प्रयोग से भाग्य के रास्ते में आ रही समस्त बाधाएं समाप्त होती हैं और व्यक्ति के जीवन में सफलता के द्वार खुलते चले जाते हैं। हनुमानजी को सुगंधित इत्र भी भेंट करें।

बजरंगबाण का फल

कहते हैं कि जब भी बजरंगबाण का पाठ होता है तो हनुमान जी स्वयं वहां उपस्थित होते हैं इसलिए इस पाठ को करने से पूर्व, पूजा स्थल पर उनके लिए लाल वस्त्र का आसन रखने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार बजरंगबाण का पाठ मात्र पुरुषों के लिए ही है। पूजा घर में अपने सामने हनुमान जी का चित्र या मूर्ति रखें तथा यह विचार करें कि हनुमान जी की दिव्य शक्तियां मेरे अंदर प्रवेश कर रही हैं। चंदन पुष्प आदि से पूजा करें। इनकी पूजा में इत्र सुगंधित द्रव्य तथा गुलाब के पुष्पों का प्रयोग वर्जित है। साधक स्वयं भी स्नान कर शुद्धवस्त्र धारण कर के बैठें। बजरंगबाण का पाठ प्रात:काल या रात में सोने से पूर्व किया जा सकता है बच्चों की नजर उतारने, शांत और गहन निद्रा के लिए, अकेले यात्रा करते समय, अकारण भय और प्रेत बाधा दूर करने में यह पाठ सक्षम है ।

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