Covid-19 Update

2,00,603
मामले (हिमाचल)
1,94,739
मरीज ठीक हुए
3,432
मौत
29,944,783
मामले (भारत)
179,349,385
मामले (दुनिया)
×

अजर, अमर, अविनाशी भगवान परशुराम

अजर, अमर, अविनाशी भगवान परशुराम

- Advertisement -

 परशुराम श्रीविष्णु के अंशावतार थे और उन्होंने क्षत्रियों के नाश के लिए ही जन्म लिया था। अजर, अमर, अविनाशी भगवान परशुराम का प्राकट्य बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) को माता रेणुका तथा पिता जमदग्रि के घर हुआ था। कहते हैं एक बार ऋषि भृगु ने अपनी पुत्रवधू सत्यवती से वर मांगने को कहा। सत्यवती ने अपने तथा अपनी माता के लिए पुत्र जन्म की कामना की। भृगु ने उन दोनों को ‘चरु’ खाने के लिए दिए तथा कहा कि सत्यवती गूलर के पेड़ तथा उसकी माता पीपल के पेड़ का आलिंगन करें तो दोनों को पुत्र प्राप्त होंगे।


मां-बेटी के चरु खाने में उलट-फेर हो गई। दिव्य दृष्टि से देखकर भृगु पुनः वहां पधारे तथा उन्होंने सत्यवती से कहा कि तुम्हारी माता का पुत्र क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मणोचित व्यवहार करेगा तथा तुम्हारा बेटा ब्राह्मणोचित होकर भी क्षत्रियोचित आचार-विचार वाला होगा। बहुत अनुनय-विनय करने पर भृगु ने मान लिया कि सत्यवती का बेटा ब्राह्मणोचित रहेगा किंतु पोता क्षत्रियों की तरह कार्य करने वाला होगा। सत्यवती के पुत्र जमदग्नि मुनि हुए। उन्होंने राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका से विवाह किया, जिनसे पांच पुत्र हुए। उनमें पांचवें पुत्र परशुराम थे। वही क्षत्रियोचित आचार-विचार वाला पुत्र था। कहते हैं कि एक बार उनकी मां रेणुका जल का कलश लेकर भरने के लिए नदी पर गईं। वहां गंधर्व चित्ररथ अप्सराओं के साथ जलक्रीड़ा कर रहा था।


उसे देखने में रेणुका इतनी तन्मय हो गईं कि जल लाने में विलंब हो गया तथा यज्ञ का समय व्यतीत हो गया। उसकी मानसिक स्थिति समझकर जमदग्नि ने अपने पुत्रों को उसका वध करने के लिए कहा। परशुराम के अतिरिक्त कोई भी ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हुआ। पिता के कहने से परशुराम ने मां का वध कर दिया। परशुराम के पिता ने अपने अन्य पुत्रों को संज्ञाहीन कर दिया । परशुराम ने पिता की आज्ञा मानकर माता का शीश काट डाला। पिता ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा तो उन्होंने चार वरदान माँगे, वे थे मां पुनर्जीवित हो जाएं उन्हें मरने की स्मृति न रहे। भाई चेतना-युक्त हो जाएं और मैं परमायु हो जाउं । जमदग्नि ने उन्हें चारों वरदान दे दिये।

दुर्वासा की भांति परशुराम भी अपने क्रोधी स्वभाव के लिए विख्यात है। एक बार कार्तवीर्य ने परशुराम की अनुपस्थिति में आश्रम उजाड़ डाला था, जिससे परशुराम ने क्रोधित हो उसकी सहस्त्र भुजाओं को काट डाला। कार्तवीर्य के संबंधियों ने प्रतिशोध की भावना से जमदग्नि का वध कर दिया। इस पर परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन कर दिया  और पांच झीलों को रक्त से भर दिया। अंत में पितरों की आकाशवाणी सुनकर उन्होंने क्षत्रियों से युद्ध करना छोड़कर तपस्या की ओर ध्यान लगाया।

 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है