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एक ऐसी गुफा जहां शिव भी हैं और यीशु भी …

Lord Shiva and Jesus are worshiped together in this Cave

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हमारे देश में सर्वधर्म सम्भाव की कई मिसालें देखने को मिलती है। बहुत से आस्था स्थल ऐसे हैं यहां पर विभिन्न धर्म व समुदाय से जुड़े लोग शीश नवाते औ प्रार्थना करते  हैं। धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोग इनसे प्रेरणा ले सकते हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक ऐसी गुफा है जो सभी आपसी भाईचारे की प्रतीक बनी है। बस्तर में कुरंदी नाम के जंगल में एक गुफा है जिसका नाम है बाघ राऊड़। इस जगह की खासियत यह है कि यह हिंदू और ईसाई दोनों के धर्मावलंबियों का आस्था स्थल है।  महाशिवरात्रि पर हिंदू यहां पर स्थापित शिवलिंग की पूरे भक्तिभाव से पूजा करते हैं तो क्रिसमस के दिन ईसाई समाज के लोग सैकड़ों मोमबत्तियां जलाकर प्रभु यीशु का स्वागत करते हैं।
बस्तर वनमंडल अंतर्गत माचकोट वन परिक्षेत्र में गणेश बहार नाला के समीप डोलोमाइट की चट्टानें हैं। इन्ही  चट्टानों के बीच ही कई प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। यहां की दो गुफाओं को ग्रामीण बाघों की गुफा कहते हैं। इनमें एक को राजा तो दूसरी को रानी गुफा का नाम दिया गया है। राजा गुफा के भीतर शिवलिंग स्थापित है। महाशिवरात्रि तथा कार्तिक पूर्णिमा के दिन ग्रामीण गणेश बहार में स्नान करने के बाद गुफा के भीतर प्रवेश कर महादेव की पूजा करते हैं। पास के गांव जीरागांव के लोग नहीं जानते कि  गुफा में शिवलिंग कब से है और इसकी स्थापना किसने की है। पर वे यहां पूजा करने जरूर आते हैं। दूसरी तरफ हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के भी बाघ राउड़ पहुंचते हैं और प्रभु यीशु के जन्मदिन पर सैकड़ों मोमबत्तियां जलाकर खुशी मनाते हैं।’बाघ की गुफा’ नाम से चर्चित यह स्थल बेहतर पिकनिक स्पॉट भी है। बाहर से  यहां पर आने वाले पर्यटक  भगवान शंकर की पूजा तो करते ही है साथ ही प्रभु यीशु के समक्ष प्रार्थना करना भी नहीं भूलते।

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