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नगर निगम में सफाई के साथ-साथ लग रहा चूना!

नगर निगम में सफाई के साथ-साथ लग रहा चूना!

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MC Dharamshala : धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला का सफाई टेंडर जब से जारी हुआ है तब से ही विवादों में रहा है। कई तरह के आरोप टेंडर हासिल करने वाली फर्म पर लगते रहे हैं। आम जनता ने तो सफाई व्यवस्था को लेकर आरोप लगाए ही, निगम की मेयर को भी सफाई ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा था। सफाई टेंडर की शर्तों के मुताबिक काम न करने के आरोप भी इस फर्म पर लगते रहे हैं और कुछ हद तक यह आरोप सही साबित होते नजर आ रहे हैं।


  • बीएचसी, फिनाइल और ब्लीचिंग पाउडर का सिर्फ कागजों में ही उपयोग

सफाई का जिम्मा संभालने वाली फर्म की कार्यप्रणाली देखकर यह कहा जा सकता है कि निगम की सफाई का जिम्मा संभालने वाली फर्म सफाई भी कर रही है और निगम को चूना भी लगा रही है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक नगर निगम के दायरे में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने और किसी तरह की बीमारी से निपटने के लिए फिनाइल, बेंजोन हैक्सा क्लोराइड यानी बीएचसी और ब्लीचिंग पावडर का इस्तेमाल किया जाना था।

टेंडर के मुताबिक हर महीने 600 लीटर फिनाइल, 900 किलोग्राम बीएचसी और 1500 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग किया जाना था। सफाई टेंडर हासिल करने वाली फर्म के प्रतिनिधि पूरे दावे के साथ यह कह रहे हैं कि इन सबका प्रयोग किया जा रहा है और हर माह किया जा रहा है। जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर कोई एक स्थान बताएं जहां पिछले एक माह के दौरान इनमें से एक भी कीटनाशक का इस्तेमाल किया गया तो उनकी खामोशी और बहानेबाजी सबकुछ बयां कर गई। फर्म के प्रतिनिधि की बातों से यही प्रतीत हुआ कि इन, सभी कीटनाशकों का उपयोग सिर्फ कागजों में ही दर्शाया जा रहा है।

इस बारे में फर्म के असाइनमेंट ऑफिसर योगेश चौधरी से बात की गई तो उनका कहना था कि उक्त कीटनाशकों का प्रयोग नियमित तौर पर किया जा रहा है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि पिछले एक माह में कहां और कितनी मात्रा में इनका उपयोग किया गया तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। उनका कहना था कि इस बारे में वह सुपरवाइजर से रिपोर्ट लेंगे। जब उनसे यह पूछा गया कि वह शहर की कोई एक जगह बता दें जहां उन्होंने इन कीटनाशकों का इस्तेमाल देखा हो तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने माना कि सारी रिपोर्ट उनके पास आती है लेकिन तीन माह की अवधि में कितनी मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।

नगर निगम में सफाई का जिम्मा मुंबई की एक फर्म को दिया गया है। पहले तो यह फर्म टेंडर के मुताबिक सफाई कर्मी नियुक्त करने में ही नाकाम रही जिसका काफी विरोध भी हुआ और जैसे-तैसे फर्म ने कर्मचारी पूरे भी कर दिए, लेकिन अब जिस तरह कीटनाशकों के इस्तेमाल की बात है तो इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसी भी नाली, सार्वजनिक शौचालय या कूड़ा एकत्र करने और उठाने की जगह पर इनका उपयोग देखा ही नहीं गया है।

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