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110 साल में पहली बार बंद रहा लखनऊ का टुंडे कबाब

110 साल में पहली बार बंद रहा लखनऊ का टुंडे कबाब

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लखनऊ अपने अवधी खाने के लिए मशहूर

Lucknow Famous Tunday Kababi Closed – लखनऊ। आप जब लखनऊ आएं और मशहूर टुंडे के कबाब खाना चाहें तो शायद आप को मायूसी हो सकती है क्योंकि लगभग 110 साल में पहली बार बंद रही। कारण यह रहा कि  टुंडे कबाब की दुकान कच्चा माल यानी भैंसे के मीट की कमी के चलते दुकान कम करनी पड़ी।कच्चे माल की कमी सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त आदेश पर अवैध बूचड़खाने बंद कर दिए जाने से पैदा हुई है। यूपी में बीजेपी आते ही प्रशासन सख्त हुआ,अवैध बूचड़खाने बंद कर दिए गए और मीट की सप्लाई एकदम से गिर गई। आपको बता दें कि सरकार की सख्ती केवल अवैध बूचड़खानों पर है लेकिन असर मीट की कमी के रूप में दिख रहा है। इससे साफ जाहिर है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी लखनऊ में अभी तक अवैध बूचड़खाने चल रहे थे।  भाजपा ने अपने चुनावी वादों में ऐसे बूचड़खानों को बंद करने का वादा किया था और 15 मार्च को शपथ ग्रहण के बाद से इस पर एक्शन भी लिया गया।

Lucknow Famous Tunday Kababi Closed – बूचड़खानों बंद होने से सबसे ज्यादा असर भैंसे के मीट पर 

लखनऊ में पिछले दो दिन से इस अभियान में तेजी आई है। नगर निगम, पुलिस और प्रशासन ने घूम-घूमकर अवैध दुकानें बंद करवा दी। सबसे ज्यादा असर भैंसे के मीट पर पड़ा। चूंकि ये मीट सस्ता होता था इसीलिए इसकी खपत भी ज्यादा थी। कल सख्ती के बाद ये मीट उपलब्ध नहीं हुआ और दुकानें नहीं खुलीं। मीट बेचने वाली दुकानें बिल्लौचपूरा, नक्खास और पुराने लखनऊ के दूसरे इलाकों में बंद रही है। लखनऊ की कुछ मशहूर दुकानें भी इससे प्रभावित हो गई। लखनऊ अपने अवधी खाने के लिए मशहूर है। इसमें टुंडे कबाब की दुकान  जो 1905 में लखनऊ में अकबरी गेट इलाके में खुली थी, बंद हो गई।  वैसे तो टुंडे कबाब ने अपनी दुकानें लखनऊ के अलावा कई जगहों पर खोल ली हैं लेकिन अकबरी गेट वाली दुकान अभी भी अपने पुराने हिसाब से चल रही थी।

पाबंदी से मायूस लखनऊ

लखनऊ की दूसरी मशहूर दुकान इदरीस की बिरयानी जो पाटा नाला पर है, वह भी दोपहर तक बंद रही। रहीम के कुलचे नहारी की दुकान ने भी मटन से काम चलाया और उसके ग्राहक भी मायूस होकर लौट गए। जू में शेर और चीतों को भी मीट नहीं मिल पाया है। ट्रेक्टर ने मीट सप्लाई नहीं किया और बताया कि कहीं मिल नहीं रहा है। जू प्रशासन नए सिरे से वैध लाइसेंस होल्डर से अब सप्लाई लेने की सोच रहा है।

 31 मार्च के बाद नहीं होगा लाइसेंस रिन्यूअल

सारी परेशानी मीट की सप्लाई की वजह से हुई और लखनऊ में कोई वैध स्लॉटर हाउस नहीं है, जहां पर बड़े जानवर काटे जाएं। ऐसे में  कमी हो जाना स्वाभाविक है। कमी अभी और होगी क्योंकि नगर निगम ने अब आगे किसी भी भैंसे के मांस की बिक्री करने वाले दुकानदारों का लाइसेंस रिन्यूअल 31 मार्च के बाद करने से मना कर दिया है। लखनऊ में दो स्लॉटर हाउस थेए जो बंद हो चुके हैं, इसीलिए पशुओं के वध के लाइसेंस तो निरस्त कर दिए और अब मांस बिक्री के लाइसेंस का नवीनीकरण रोक दिया गया है।

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