जाने कब है चंद्रग्रहणः इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए…

जाने कब है चंद्रग्रहणः इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए…

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इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी लगेगा। चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा का मंडल लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे खगोलविद् ‘ब्लड मून’ के नाम से जानते हैं। यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसे केवल अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य प्रशांत में दिखा जा सकता है। भारतीय समयानुसार चंद्रग्रहण सुबह 10.11 बजे से शुरू होगा और तकरीबन 1 घंटा यानि 11.12 बजे तक रहेगा। सूतक 20 जनवरी की रात 9 बजे से ही शुरू हो जाएगा।

चंद्र ग्रहण के बाद स्नान और दान करें। गेहूं, धान, चना, मसूर दाल, गुड़, चावल,काला कम्बल, सफेद-गुलाबी वस्त्र, चूड़ा, चीनी, चांदी-स्टील की कटोरी में खीर दान करने से लाभ होगा। चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण एक सवाल हमेशा सामने आता है कि ग्रहण के दिन क्या करें क्या न करें। तो इस बारे में आपको सलाह दी जाती है कि चंद्र ग्रहण के दिन बुजूर्ग, रोगी एवं बच्चों को छोड़कर घर के बाकि सदस्य भोजन न करें।

चंद्र ग्रहण का सबसे अधिक असर गर्भवती स्त्रियों पर पड़ता है। ऐसे में ग्रहण के सूतक काल के दौरान गर्भवती स्‍त्रियों को कई तरह के कार्य करने से बचना चाहिए,

गर्भवती स्त्रियोँ को ग्रहण में घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है दरअसल माना जाता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा होता है इसलिये घर में रहकर मंत्रोंच्चारण करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

किसी भी प्रकार के शुभ कार्य ग्रहण के दिन न करें।

अपने मन में दुर्विचारों को न पनपने दें। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और अपने आराध्य देव का ध्यान लगायें।

जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़े साती या ढईया का प्रभाव चल रहा है, वे शनि मंत्र का जाप करें एवं हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।

जिन जातकों की कुंडली में मांगलिक दोष है, वे इसके निवारण के लिये चंद्रग्रहण के दिन सुंदरकांड का पाठ करें तो इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगें।

आटा, चावल, चीनी, श्वेत वस्त्र, साबुत उड़द की दाल, सतनज, काला तिल, काला वस्त्र आदि किसी गरीब जरुरतमंद को दान करें।

ग्रहों का अशुभ फल समाप्त करने और विशेष मंत्र सिद्धि के लिये इस दिन नवग्रह, गायत्री एवं महामृत्युंजय आदि शुभ मंत्रों का जाप करें। दुर्गा चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमदभागवत गीता, गजेंद्र मोक्ष आदि का पाठ भी कर सकते हैं।

ग्रहण लगने के बाद स्‍नान करना चाहिए जिससे सूतक का असर खत्म हो जाए। स्नान करके मंदिर की मूर्ति को गंगा जल से धोकर स्वच्छ करें फिर पूजन और भगवान का भोग लगाकर दान करें और उसके बाद भोजन ग्रहण करें।

 

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