Covid-19 Update

2,05,061
मामले (हिमाचल)
2,00,704
मरीज ठीक हुए
3,498
मौत
31,440,951
मामले (भारत)
195,407,759
मामले (दुनिया)
×

मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन, स्तंभन की देवी मां त्रिपुरसुन्दरी  

मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन, स्तंभन की देवी मां त्रिपुरसुन्दरी  

- Advertisement -

महाविद्याओं में तीसरे स्थान पर विद्यमान महाशक्ति त्रिपुरसुंदरी, तीनों लोकों में सोलह वर्षीय युवती स्वरूप में सर्वाधिक मनोहर तथा सुन्दर रूप से सुशोभित हैं। देवी का शारीरिक वर्ण हजारों उदीयमान सूर्य के कांति की भांति है। देवी की चार भुजाएं तथा तीन नेत्र  हैं। समस्त तंत्र और मंत्र देवी की आराधना करते हैं तथा वेद भी इनकी महिमा वर्णन करने में असमर्थ हैं। भक्त पर प्रसन्न हो ये देवी सर्वस्व प्रदान करती हैं। देवी त्रिपुरसुंदरी चेतना से संबंधित हैं। यंत्रों में श्रेष्ठ श्री यन्त्र साक्षात् देवी त्रिपुरा का ही स्वरूप है। वे श्री यन्त्र के केंद्र में निवास करती हैं। इनका घनिष्ठ संबंध गुप्त अथवा परा शक्तियों, विद्याओं से हैं; तन्त्र की ये अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन, स्तंभन इत्यादि प्रयोगों की यही देवी हैं …

 

मां श्री विद्या विविध रूपों में अवतरित हो विश्व का कल्याण करती हैं तथा श्री विद्या के नाम से विख्यात हैं। वे ब्रह्माण्ड की नायिका हैं तथा विभिन्न प्रकार के असंख्य देवताओं, गन्धर्वो, राक्षसों इत्यादि द्वारा सेवित तथा वंदिता हैं। देवी त्रिपुरा, चैतन्य-रुपा चिद शक्ति तथा चैतन्य ब्रह्म हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार मां त्रिपुर सुंदरी भगवान शिव की ही पत्नी मां पार्वती का रूप हैं। इसलिए ऐसा माना जाता है कि मां पार्वती या उनके रूप को प्रसन्न करने का अर्थ है अपने आप ही शिव कृपा की प्राप्ति होना।मां त्रिपुर सुंदरी का चमत्कारी शक्तिपीठ राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में आता है। यहां ‘मां त्रिपुर सुंदरी देवी’ मंदिर बनाया गया है,। यह मंदिर मूलत: इस क्षेत्र के उमरई गांव में आता है, जहां पांचाल ब्राह्मणों की एक छोटी सी जनसंख्या रहती है।

 


हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group…

 

यह बात विक्रम संवत् 1102 की है, जब मान्यतानुसार ऐसा कहा जाता है कि एक बार स्वयं मां सुंदरी ही भिखारिन का रूप धारण कर उस क्षेत्र के पांचाल लोगों के पास दीक्षा मांगने आई थीं। उस समय वे लोग खदान में काम कर रहे थे इसलिए उन्होंने भिखारिन को नजरअंदाज कर दिया, जिसके बाद वह वहां से चली गई। लेकिन कहते हैं कि उसके जाने के ठीक बाद ही वह खदान ढह गई और सारे लोग उसमें दबकर मर गए। यह खदान आज भी वहीं है, जो मंदिर के पास ही बनी हुई है और स्थानीय लोगों में ‘फटी खदान’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस कहानी में कितनी सच्चाई है यह तो कोई नहीं जानता लेकिन लोगों में मान्यता यह है कि जो भी मां के इस शक्तिपीठ में आकर दिल से साधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है