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इस बार कुछ खास है माघ पूर्णिमा जानें कैसे ….

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हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का कार्तिक पूर्णिमा जैसा महत्व है। वैसे तो वर्ष के प्रत्येक माह की पूर्णिमा का महत्व है परन्तु माघ पूर्णिमा की बात भिन्न है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक ही दिन में माघ पूर्णिमा, चंद्रग्रहण, सुपर मून और ब्लू मून पड़ रहे हैं। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों तथा सरोवरों या संभव हो तो संगम में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के सारे पाप कट जाते हैं तथा व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माघ पूर्णिमा के दिन सभी देवी-देवता अंतिम बार स्नान करके अपने लोकों को प्रस्थान करते हैं। इस दिन संगम प्रयाग की रेत पर स्नान करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

मघा नक्षत्र के नाम पर माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। माघ माह में देवता-पितृगण सदृश होते हैं। सामान्य तौर पर माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है जिसे सत्यनारायण पूजा भी कहते हैं। इस दिन उपासक को भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, पान, सुपारी, दूर्वा तथा प्रसाद में चूरमा से किया जाता है। भगवान विष्णु व्रती के विधि-विधान से सम्पन्न किये गए पूजा को स्वीकार करते है। पूजन समाप्ति के समय भगवान विष्णु से परिवार के सुख, शांति और मंगल की कामना करे। भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से व्रती का सदैव मंगल होता है।सबसे पहले इस दिन सूरज उगने से पहले स्नान करें व सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाने के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान मधुसूदन की पूजा करें। दिन में गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान और दक्षिणा दें। दान में काले तिल विशेषकर दें, इससे पितरों को शांति मिलती है।

माघ पूर्णिमा का 2018 मुहूर्त

माघ पूर्णिमा का आरंभ 30 जनवरी, 2018 को 11 बजकर 24 मिनट और 5 सेकेंड पर शुरू होकर 31 जनवरी, 2018 को 6 बजकर 57 मिनट और 43 सेकेंड पर समाप्त होगा।

क्या करें क्या नहीं

इस दिन दान करें। दान में आटा, चावल, चीनी, दाल आदि दें। ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए दुर्गा चालीसा या श्रीमदभागवत गीता आदि का पाठ भी करें। जो लोग साढ़े-साती से परेशान हो तो शनि मंत्र का जाप करें या फिर हनुमान चालीसा पढ़ें। ग्रहण के वक्त खुले आकाश के नीचे खासकर प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चे न निकलें। कहा जाता है कि ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाना चाहिए। किसी भी तरह का शुभ कार्य न करें।

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