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देश का अंतिम गांव बनेगा “हेरिटेज विलेज,” चार करोड़ की राशि हुई मंजूर

देश का अंतिम गांव बनेगा “हेरिटेज विलेज,” चार करोड़ की राशि हुई मंजूर

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देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) के eritage) विलेज बनाया जाएगा। माणा गांव चीन सीमा पर देश का अंतिम गांव कहलाता है। इस गांव के लिए सीमांत क्षेत्र विचमोली जिला में बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) से महज कुछ दूरी पर स्थित माणा गांव (Mana village) को हेरिटेज (Hकास निधि और स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत चार करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है। इस धनराशि से माणा में ऑडिटोरियम, एंपीथियेटर, म्यूजियम और पार्किंग का निर्माण होना है। साथ ही भीमपुल, व्यास गुफा, गणेश गुफा व आसपास के क्षेत्रों का सुंदरीकरण भी होना प्रस्तावित है।

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समुद्र तल से 3118 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा गांव वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पूर्व तिब्बत से व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। युद्ध के बाद यहां से तिब्बत की आवाजाही पर रोक लगा दी गई, लेकिन माणा का महत्व फिर भी बना रहा। आज भी हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु माणा की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व पौराणिक विरासत को देखने के लिए यहां आते हैं। यहां के बाशिंदे बद्रीनाथ धाम के हक-हकूकधारी हैं। माणा में भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं, जो तीर्थाटन एवं पर्यटन से अपनी आजीविका चलाते हैं। माणा गांव से लगे कई ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं। गांव से कुछ ऊपर चढ़ाई पर चढ़ें तो पहले नज़र आती है गणेश गुफा और उसके बाद व्यास गुफा। व्यास गुफा के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर वेदव्यास ने पुराणों की रचना की थी और वेदों को चार भागों में बांटा था।

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