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खेलों में नाम करने वालों की कुंडली में मंगल का योगदान

खेलों में नाम करने वालों की कुंडली में मंगल का योगदान

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कुछ समय पहले तक माता-पिता अपने बच्चों का खेल को करियर के रूप अपनाना ठीक नहीं समझते थे। परन्तु आज के समय में खेल को लेकर सभी का दृष्टिकोण बदल गया है। वर्तमान में खेलों में करियर बनाना एक सुनहरा अवसर माना जाने लगा है और अभिभावक भी अपने बच्चों का इसमें पूरा सहयोग करते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो विशेष रूप से तो “मंगल” को ही खेलों या स्पोर्ट्स का कारक मना गया है क्योंकि खेलों में सफलता के लिए व्यक्ति का शारीरिक गठन, मांसपेशियां, फिटनेस और कार्य और पुरुषार्थ-क्षमता बहुत अच्छी होनी चाहिए इसके अलावा हिम्मत, शक्ति, पराक्रम, निर्भयता और प्रतिस्पर्धा का सामना करना एक अच्छे खिलाड़ी के गुण होते हैं। इन सभी का नियंत्रक ग्रह मंगल होता है इसलिए खेल में जाने के लिए हमारी कुंडली में मंगल का अच्छी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है। मंगल के प्रबल प्रभाव वाले जातक शारीरिक रूप से बलवान तथा साहसी होते हैं। ऐसे जातक स्वभाव से जुझारू होते हैं तथा विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत से काम लेते हैं तथा सफलता प्राप्त करने के लिए बार-बार प्रयत्न करते रहते हैं और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं तथा मुश्किलों के कारण आसानी से विचलित नहीं होते।

मंगल आम तौर पर ऐसे क्षेत्रों का ही प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें साहस, शारीरिक बल, मानसिक क्षमता आदि की आवश्यकता पड़ती है जैसे कि पुलिस की नौकरी, सेना की नौकरी, अर्ध-सैनिक बलों की नौकरी, अग्नि-शमन सेवाएं, खेलों में शारीरिक बल तथा क्षमता की परख करने वाले खेल जैसे कि कुश्ती, दंगल, टेनिस, फुटबाल, मुक्केबाजी तथा ऐसे ही अन्य कई खेल जो बहुत सी शारीरिक उर्जा तथा क्षमता की मांग करते हैं।

मंगल ग्रह शारीरिक तथा मानसिक शक्ति और ताकत का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल के प्रबल प्रभाव से व्यक्ति में साहस , लड़ने की क्षमता और निड़रता का भाव आता है।
मंगल के प्रभाव स्वरुप जातक सामान्यतयः किसी भी प्रकार के दबाव के आगे नहीं झुकता। मंगल के द्वारा साहस, शारीरिक बल, मानसिक क्षमता प्राप्त होती है। पुलिस, सेना, अग्नि-शमन सेवाओं के क्षेत्र में मंगल का अधिकार है खेल कूद इत्यादि में जोश और उत्साह मंगल के प्रभाव से ही प्राप्त होता है।

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मंगल को ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति के साहस, छोटे भाई-बहन, आन्तरिक बल, अचल सम्पति, रोग, शत्रुता, रक्त शल्य चिकित्सा, विज्ञान, तर्क, भूमि, अग्नि, रक्षा, सौतेली माता, तीव्र काम भावना, क्रोध, घृ्णा, हिंसा, पाप, प्रतिरोधिता, आकस्मिक मृत्यु, हत्या, दुर्घटना, बहादुरी, विरोधियों, नैतिकता की हानि का कारक ग्रह ।

इसके अतिरिक्त मंगल ऐसे क्षेत्रों तथा व्यक्तियों के भी कारक होते हैं जिनमें हथियारों अथवा औजारों का प्रयोग होता है जैसे हथियारों के बल पर प्रभाव जमाने वाले गिरोह, शल्य चिकित्सा करने वाले चिकित्सक तथा दंत चिकित्सक जो चिकित्सा के लिए धातु से बने औजारों का प्रयोग करते हैं।

जानिए खेलों में कामयाबी योग

कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी अपनी दशा और अंतर्दशा में जातक को कामयाबी प्रदान करते है।
यदि मंगल बलि होकर कुंडली के दशम भाव में बैठा हो या दशम भाव पर मंगल की दृष्टि हो तो स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है।

खेलों में सफलता या अच्छा करियर बनाने में मुख्य रूप से मंगल की भूमिका तथा तीसरे और छटे भाव की सहायक भूमिका है परन्तु इसके अतिरिक्त किसी भी खेल से जुड़े खिलाड़ी की कुंडली में “बुध” जितना मजबूत और अच्छी स्थिति में होगा वह खिलाड़ी उतना ही जल्दी और अच्छे निर्णय ले पाएगा जिससे प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में सहायता होगी अतः एक खिलाड़ी की कुंडली में बुध का मजबूत होना उसकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देता है ।

जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो,शुभ फलदायक होगा।
इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।
-त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं। क्रूर भावों (3,6,11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।
दुष्ट स्थानों (6,8,12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं। शुभ ग्रह केन्द्र (1,4,7,10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।
-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं। सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं।

यदि मंगल , शनि से पांचवे या नौवें भाव में बलि होकर बैठा हो तो भी स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है।
तीसरे भाव के स्वामी का तीसरे भाव में ही बैठना या तीसरे भाव को देखना भी स्पोर्ट्स में जाने के लिए सहायक होता है।
षष्टेश का छटे भाव में बैठना या छटे भाव को देखना भी एक खिलाड़ी के लिए सहायक होता है।
कुंडली के तीसरे भाव में क्रूर ग्रहों ( राहु, केतु, शनि, मंगल, सूर्य) का होना एक खिलाडी का प्रक्रम बढ़ा कर उसे प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है। यदि तृतीयेश दसवें भाव में हो और मंगल ठीक स्थिति में हो तो भी खेलों में सफलता मिलती है।
पंचमहापुरुष योगों में से “रूचक-योग” का कुंडली में बनना स्पोर्ट्स में सफलता दिलाता है।

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